रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों दो दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं, जिसे भारत-रूस संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह यात्रा नई दिल्ली में होने वाले 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के संदर्भ में हो रही है, जहां दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं।पुतिन के भारत पहुंचने के बाद उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट भी उनके कार्यक्रम में शामिल है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक आवास पर पुतिन के सम्मान में निजी रात्रिभोज की मेजबानी कर रहे हैं, जिसे दोनों नेताओं के बीच भरोसेमंद और ‘निजी’ संवाद का प्रतीक माना जा रहा है। अगले दिन हैदराबाद हाउस में औपचारिक वार्ता और शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।इस यात्रा के केंद्र में रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य प्रमुख रूप से शामिल है। दोनों देश वर्तमान लगभग 68 अरब डॉलर के व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में ठोस रोडमैप तैयार कर रहे हैं।रक्षा क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं, आधुनिक लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा के मोर्चे पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति, दीर्घकालिक अनुबंध और भुगतान प्रणाली जैसे मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण निर्णयों की अपेक्षा की जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी प्रतिबंध और टैरिफ दबाव भारतीय नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती बने हुए हैं।शिखर बैठक के दौरान व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों और ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। तकनीक, अंतरिक्ष, परिवहन, खनन और नवाचार के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने के संकेत पहले ही रूसी पक्ष की ओर से दिए जा चुके हैं।यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब रूस यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण वैश्विक दबाव का सामना कर रहा है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम रहते हुए अमेरिका और यूरोप के साथ भी संबंध संतुलित रखना चाहता है। पुतिन की यात्रा को इस संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि भारत-रूस संबंध दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर आधारित हैं और किसी तीसरे देश के दबाव से इन्हें परिभाषित नहीं किया जाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन रक्षा सौदों, सस्ती ऊर्जा आपूर्ति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सहयोग जैसे मुद्दों पर ठोस रोडमैप पेश कर सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत-रूस साझेदारी और गहराई हासिल करेगी।