उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला आरक्षण को राज्य के भविष्य के लिए एक युगांतकारी और क्रांतिकारी कदम बताया है। 15 अप्रैल 2026 को देहरादून में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को सशक्त बनाने से ही एक विकसित समाज की नींव रखी जा सकती है

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण केवल प्रतिनिधित्व का जरिया नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्य भूमिका में लाएगा।

भविष्य की तैयारी और सीएम का ‘मास्टरस्ट्रोक’
  • सांसदों को पत्र: सीएम धामी ने 16 अप्रैल से संसद में शुरू हो रहे विशेष सत्र से पहले सभी सांसदों और राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की अपील की है।
  • 2029 का लक्ष्य: उन्होंने कहा कि 2029 में महिला आरक्षण के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद भारतीय लोकतंत्र और अधिक जीवंत और मजबूत होगा।
  • पर्वतीय नेतृत्व: धामी ने उल्लेख किया कि उत्तराखंड के नगर निकायों और पंचायतों में महिला आरक्षण का मॉडल पहले ही सफल रहा है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने को तैयार है।

राज्य में 30% क्षैतिज आरक्षण
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार ने पहले ही राज्य की मूल निवासी महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) को कानूनी रूप दे दिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति के संघर्ष और राज्य निर्माण में उनके योगदान का सम्मान बताया।

मुख्य बिन्दु:
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 2023 में पारित यह कानून लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करेगा।
  • संसद का विशेष सत्र: 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद में इस अधिनियम से संबंधित संशोधनों पर चर्चा प्रस्तावित है।
  • सम्मान समारोह: सम्मेलन के दौरान सीएम ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *