देहरादून:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा है कि देवभूमि उत्तराखंड के भीतर किसी भी कीमत पर सार्वजनिक सड़कों और मार्गों को अवरुद्ध कर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में हिदायत दी है कि कानून-व्यवस्था और शासन की नियमावली से ऊपर कोई भी व्यक्ति नहीं है। जो कोई भी इस व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करेगा, उसके खिलाफ प्रशासन अत्यंत कठोर कानूनी कदम उठाएगा। [1, 2, 3, 4, 5, 6]
चारधाम यात्रा का हवाला और यात्रियों की सुरक्षा
यह महत्वपूर्ण निर्देश देहरादून में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान सामने आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय उत्तराखंड में पवित्र चारधाम यात्रा अपने पूरे चरम पर है। देश और दुनिया भर से लाखों सनातनी श्रद्धालु और तीर्थयात्री बाबा केदार, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए देवभूमि पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक प्रदर्शन या रुकावट से यातायात प्रभावित होता है, जिससे देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चारधाम यात्रा सुगम, सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न हो। 
निर्धारित स्थानों और मस्जिदों में ही पढ़ी जाए नमाज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सभी धर्मों और आस्थाओं का पूरा सम्मान करती है। नागरिकों को अपने धार्मिक रीति-रिवाज निभाने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसका एक सही और कानूनी तरीका होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदें, ईदगाह और अन्य सरकार द्वारा निर्धारित स्थान मौजूद हैं। नमाज केवल उन्हीं तय और आरक्षित स्थानों के भीतर ही पढ़ी जानी चाहिए। आस्था के नाम पर आम जनता के लिए बनाई गई सार्वजनिक सड़कों को बंधक बनाना या यातायात को पूरी तरह ठप करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। 
तुष्टिकरण की राजनीति पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री धामी ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बयानों पर पलटवार करते हुए गहरी आपत्ति जताई। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता हरीश रावत ने सड़कों पर नमाज पढ़ने का समर्थन करते हुए इसे नागरिकों का संवैधानिक अधिकार बताया था और कहा था कि विशेष परिस्थितियों में मजबूरी के कारण लोग सड़क पर आते हैं। 
इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सीएम धामी ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और नेता हर एक विषय को केवल अपने संकुचित ‘वोट बैंक’ और तुष्टिकरण के चश्मे से देखते हैं। उन्होंने गर्जना करते हुए कहा कि देवभूमि में दशकों से चली आ रही तुष्टिकरण की इस पुरानी राजनीति को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। उत्तराखंड की शांतिप्रिय संस्कृति, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक अनुशासन के साथ किसी को भी खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जाएगी। 
अराजकता फैलाने वालों को कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री ने राज्य की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूरे सूबे में कड़ी निगरानी रखें। सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी तरह के अनधिकृत धार्मिक जमावड़े को रोकने के लिए तत्परता से काम किया जाए। यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन जानबूझकर नियमों की अवहेलना करता है या कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सड़कों का उपयोग केवल जनता की सुगम आवाजाही और परिवहन के लिए होना चाहिए, इसे किसी भी तरह के धार्मिक प्रदर्शन का मंच नहीं बनने दिया जाएगा।

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