देहरादून:
उत्तराखंड विशेष कार्य बल (Uttarakhand STF) ने राजधानी देहरादून में “ऑपरेशन फेक पिल” (Operation Fake Pill) के तहत एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ऑनलाइन दवा धोखाधड़ी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह शातिर गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फर्जी ऑनलाइन नेटवर्क का सहारा लेकर देश की नामचीन फार्मास्युटिकल कंपनियों के नाम पर धड़ल्ले से नकली और जानलेवा दवाइयां बेच रहा था। एसटीएफ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के दो मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की इस बड़ी कामयाबी से ऑनलाइन मेडिकल स्पेस में चल रहे एक बड़े संगठित अपराध का खुलासा हुआ है जो सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था। 
फेसबुक पेज ‘एसके हेल्थ केयर’ से फैलाया जाल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एसटीएफ अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह गिरोह “एसके हेल्थ केयर” (SK Health Care) नाम से एक फर्जी फेसबुक पेज संचालित कर रहा था। इस पेज पर सन फार्मा (Sun Pharma), मैनकाइंड (Mankind), ग्लेनमार्क (Glenmark), जाइडस, टोरेंट और मैकलियोड्स जैसी प्रतिष्ठित और बड़ी कंपनियों की दवाओं की तस्वीरें अपलोड की जाती थीं। गंभीर और जीवन रक्षक बीमारियों जैसे कि कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर, गठिया और गंभीर संक्रमण (Infections) की महंगी दवाइयों को निशाना बनाया जाता था। इन ब्रांडेड दवाओं को इंटरनेट पर “भारी डिस्काउंट” और “आधे दामों” पर बेचने का झांसा देकर मरीजों और उनके तीमारदारों को फंसाया जाता था। 
फर्जी ग्राहक बनकर एसटीएफ ने बिछाया जाल
गिरोह की भनक लगते ही उत्तराखंड पुलिस ने बेहद सतर्कता से काम लिया। जांच अधिकारियों ने सन फार्मा और मैनकाइंड जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से संपर्क किया और बाजार से दवाओं के सैंपल लेकर जांच करवाई, जो लैब टेस्ट में पूरी तरह फेल और नकली पाए गए। इसके बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर यशपाल बिष्ट की अगुवाई में टीम ने खुद एक फर्जी ग्राहक (डमी कस्टमर) बनकर उक्त फेसबुक पेज के जरिए ऑनलाइन दवाओं का ऑर्डर बुक किया। जैसे ही गिरोह ने कूरियर सर्विस के जरिए दवाओं की खेप देहरादून भेजी, वैसे ही पुलिस ने जाल बिछाकर पार्सल को जब्त किया और कूरियर के सुरागों का पीछा करते हुए आरोपियों को दबोच लिया। 
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और आपराधिक इतिहास
एसटीएफ द्वारा दबोचे गए आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है: 
  • जतिन सैनी: निवासी संभल, उत्तर प्रदेश।
  • गौरव त्यागी: निवासी जीएमएस रोड देहरादून (मूल निवासी: खरखौदा, मेरठ, यूपी)। 
पूछताछ में पता चला है कि आरोपी गौरव त्यागी एक पुराना और शातिर अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के विभिन्न थानों में नकली दवाइयों की तस्करी और धोखाधड़ी के कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। []
6 राज्यों में फैला था नेटवर्क, बंद फैक्ट्रियों में होता था निर्माण
एसटीएफ के एएसपी विवेक कुमार के अनुसार, इस गिरोह के तार उत्तराखंड समेत छह राज्यों— उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड तक फैले हुए हैं। आरोपी उत्तर प्रदेश के संभल से पूरे फर्जी कॉलिंग और ऑनलाइन ऑर्डर बुकिंग सिस्टम को संभाल रहे थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि ये लोग हरिद्वार के भगवानपुर, रुड़की और पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार सिडकुल (SIDCUL) क्षेत्रों में स्थित बंद पड़ी फैक्ट्रियों का इस्तेमाल छिपकर नकली दवाइयां तैयार करने के लिए कर रहे थे। वहां नामी कंपनियों के नकली रैपर, आउटर बॉक्स और हूबहू दिखने वाली फर्जी गोलियां तैयार कर उन्हें सप्लाई चेन में डाला जा रहा था। 
साइबर थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज
प्रशासन ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही राज्य में नकली दवाओं के अवैध धंधे पर पूरी तरह रोक लगाने के कड़े निर्देश जारी किए थे। इसी क्रम में, पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में संगठित अपराध, धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी, कॉपीराइट उल्लंघन और आईटी एक्ट (IT Act) की बेहद सख्त और गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। एसटीएफ अब इन आरोपियों के बैंक खातों, फर्जी सिम कार्डों और कूरियर पार्टनर्स की कुंडली खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और अवैध मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के अन्य सहयोगियों को भी जेल भेजा जा सके। 
आम जनता के लिए पुलिस की जरूरी गाइडलाइन
एसटीएफ ने जनता को आगाह करते हुए अपील की है कि अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया विज्ञापनों के बहकावे में आकर भारी छूट के लालच में दवाएं कतई न खरीदें। हमेशा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या प्रमाणित ऑनलाइन फार्मेसी से ही पक्के बिल के साथ दवाएं लें।

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