नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में रविवार को दिल्ली में निकाले गए मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। इंडिया गेट से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, यह लगातार तीसरे दिन था जब दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में नागरिक मार्च निकाला गया। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी इंडिया गेट क्षेत्र से प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के कारण मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हो सकते हैं और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही प्रदर्शनकारी शांगरी-ला होटल के आसपास पहुंचे, भारी संख्या में तैनात पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने सड़क पर बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस तथा धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जनपथ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 के पास जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। फिरोज शाह रोड पर भी दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई थी। पुलिस प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थी।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी पहली बैरिकेडिंग पार करने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हिन्दुस्तान के अनुसार, इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं।
पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की हिरासत कार्रवाई का विरोध किया और कुछ लोगों ने पुलिस की बसों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी बसों के आगे सड़क पर बैठ गए और हिरासत में लिए गए अपने साथियों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
स्थिति बिगड़ने के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस बसों के शीशे तोड़े जाने की भी खबर सामने आई। इस घटना में कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र में रखने की कोशिश की।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को केंद्रीय दिल्ली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। लगभग 5,000 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था और 120 से अधिक लोगों को थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी और कार्रवाई के दौरान न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया।
इस बीच आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक इंडिया गेट से जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक कुलदीप कुमार समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। AAP नेताओं ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया, जबकि पुलिस की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद का एक और मुद्दा हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने वाली बसें बनीं। प्रदर्शनकारियों ने बसों का रास्ता रोक दिया। कुछ लोगों ने बस के पीछे का दरवाजा खोलकर अंदर मौजूद साथियों को बाहर निकालने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को संशोधित करने की प्रक्रिया का उद्देश्य गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
दिल्ली में हुए इन प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई भी राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा सख्ती का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा बिना अनुमति मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों पर कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने का मामला भी सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। पुलिस ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध CCTV फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है।
रविवार के मार्च में प्रदर्शनकारियों के जंतर-मंतर तक पहुंचने के प्रयास और पुलिस की बैरिकेडिंग के बीच कई जगह तनाव देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने उन्हें निर्धारित स्थान से आगे जाने से रोकने का प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप नोकझोंक, धक्का-मुक्की और हिरासत की घटनाएं सामने आईं।
दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल SIR और CEC के इस्तीफे को लेकर विरोध जारी रहने की संभावना है और आने वाले दिनों में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी जा सकती है।