देहरादून: उत्तराखंड के निजी आयुष कॉलेजों में कथित नियम विरुद्ध दाखिलों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने निजी आयुर्वेद कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को विस्तृत पत्र भेजा है। पत्र के साथ उन्होंने 100 से अधिक दस्तावेज भी शासन को उपलब्ध कराए हैं। यह जानकारी 6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित दैनिक जागरण और लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्टों में सामने आई है।

कुलसचिव के पत्र के अनुसार, निजी आयुष कॉलेजों में वर्ष 2018-19 से 2023-24 तथा वर्ष 2024 के दौरान बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस पाठ्यक्रमों में कथित तौर पर निर्धारित नियमों का पालन किए बिना दाखिले किए गए। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ छात्रों को नीट परीक्षा पास किए बिना, निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना और काउंसलिंग प्रक्रिया के बाहर प्रवेश दिया गया।

बैकडोर एंट्री से दाखिले का आरोप

कुलसचिव ने शासन को भेजे पत्र में निजी संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार कुछ अयोग्य अथवा नीट में सफल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों को कथित तौर पर ‘बैकडोर एंट्री’ के माध्यम से मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था बनाई गई। उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से उन छात्रों के अधिकार प्रभावित होते हैं, जिन्होंने निर्धारित नियमों के अनुसार प्रवेश पाने के लिए परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित मानकों के विपरीत प्रवेश लेकर छात्रों को आगे परीक्षा और डिग्री की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है तो इसका असर चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही होगी।

बैकडेट में नामांकन और रोल नंबर जारी करने पर भी सवाल

कुलसचिव ने कुछ कॉलेजों में बैकडेट में नामांकन किए जाने के आरोप भी पत्र में उठाए हैं। इसके साथ ही उचित दस्तावेजी सत्यापन और मिलान के बिना छात्रों को परीक्षा के लिए रोल नंबर जारी किए जाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

कुलसचिव के अनुसार विश्वविद्यालय में मजबूत और प्रभावी काउंसलिंग सॉफ्टवेयर या सिस्टम का अभाव भी इस पूरी व्यवस्था की बड़ी कमजोरी रहा है। उनका कहना है कि इस कमी के कारण निजी संस्थानों, बिचौलियों और कथित शिक्षा माफिया को नियमों से बाहर जाकर दाखिले कराने का अवसर मिला।

परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल

शासन को भेजे गए पत्र में केवल दाखिला प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर शिकायतों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक कॉलेज में परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाएं कथित तौर पर ढाबे में भरवाए जाने की शिकायत का भी पत्र में जिक्र है। शिकायत के बाद परीक्षा केंद्र बदले जाने की बात सामने आई है।

इसके अलावा कुछ मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध नहीं होने अथवा खराब होने और मूल परिसर से बाहर पर्याप्त निगरानी के बिना उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरटीआई के माध्यम से छात्रों को उपलब्ध कराई गई उत्तर पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ियों का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।

छात्रों के आंदोलन का भी उल्लेख

कुलसचिव ने शासन को भेजे पत्र में कथित अवैध तरीके से प्रवेश पाने वाले छात्रों से जुड़े विरोध और आंदोलनों का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्र परीक्षा में बैठने, परिणाम घोषित करने और डिग्री जारी करने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय में आंदोलन कर चुके हैं।

पत्र में विश्वविद्यालय परिसर में तालाबंदी, मुख्य द्वार बंद करने, कर्मचारियों को काम करने से रोकने और एक मामले में पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किए जाने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने की मांग

कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने अपने पत्र में शासन से उन्हें कुलसचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध भी किया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि परिस्थितियों के बीच वह अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असहज महसूस कर रहे हैं और विश्वविद्यालय हित में उठाए जा रहे उनके प्रयासों में बाधाएं आ रही हैं।

उनका पत्र करीब एक माह पहले शासन को गोपनीय रूप से भेजा गया था। अब पत्र के सार्वजनिक होने के बाद निजी आयुष कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया और विश्वविद्यालय की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुलसचिव ने पत्र सार्वजनिक होने के तरीके की जांच की मांग भी की है।

पहले से चल रही है जांच

निजी आयुष कॉलेजों में कथित अवैध दाखिलों को लेकर पहले से ही विजिलेंस जांच चल रही है। ऐसे में कुलसचिव की ओर से शासन को भेजे गए दस्तावेजों और आरोपों को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब शासन स्तर पर इन दस्तावेजों की जांच और लगाए गए आरोपों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में मेडिकल और आयुष शिक्षा से जुड़े दाखिलों को लेकर दस्तावेजों की जांच पर भी सरकार का जोर है। हाल ही में राज्य में नीट-यूजी दाखिलों से जुड़े कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के मामले में भी जांच और कार्रवाई हुई है।

नोट: निजी आयुष कॉलेजों पर लगाए गए अवैध दाखिलों और परीक्षा संबंधी आरोप फिलहाल जांच के विषय हैं। इन्हें अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित जांच और शासन की कार्रवाई के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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