देहरादून, 7 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि अगर मतदाता सूची को व्यवस्थित और शुद्ध करने के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है, तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सवाल किया कि “घुसपैठियों को वोट का हक क्यों मिले?”
मुख्यमंत्री धामी ने मंगलवार को देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में SIR की प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है। उनके अनुसार, इससे पहले भी कई बार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा चुका है। ऐसे में इस बार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाने पर उन्होंने विपक्ष से पूछा कि पहले जब SIR हुआ था, तब इस तरह का विरोध क्यों नहीं किया गया।
मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह मतदाता के रूप में दर्ज है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी तरह जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर चले गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची में बने रहने का भी उन्होंने सवाल उठाया।
धामी के मुताबिक, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित करना और उसमें मौजूद गलत, दोहराए गए या अपात्र नामों को हटाना है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम होने चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
“वोटर लिस्ट शुद्ध हो रही है तो आपत्ति क्यों?”
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची को शुद्ध और व्यवस्थित करने का काम किया जा रहा है तो किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के रुख पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची को दुरुस्त किए जाने का विरोध हो रहा है, तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में चुनाव संविधान और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना बेहद जरूरी है।
कांग्रेस लगातार SIR का विरोध कर रही है
SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि मतदाता सूची में मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट अथवा अपात्र मतदाताओं के नाम नहीं होने चाहिए। वहीं विपक्ष लगातार यह आशंका व्यक्त कर रहा है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाएं अपने निर्धारित नियमों और कानून के अनुसार काम कर रही हैं। उन्होंने विपक्ष पर संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठाने का आरोप भी लगाया।
उत्तराखंड में SIR के बाद बदली मतदाता सूची
उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई मतदाता सूची जारी की जा चुकी है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर SIR Final Roll 2026, हटाए गए मतदाताओं की जानकारी तथा अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं से संबंधित सूचियां उपलब्ध कराई गई हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, SIR के बाद उत्तराखंड में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में अधिक कमी दर्ज की गई। 70 विधानसभा सीटों में से 36 मैदानी और 34 पर्वतीय सीटों में मतदाता संख्या में बदलाव सामने आया है।
धामी बोले- संविधान और व्यवस्था के अनुसार चलेगा देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि देश संविधान और तय व्यवस्था के अनुसार चलेगा। उन्होंने SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए मतदाता सूची का सही होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम कई स्थानों पर दर्ज है, किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी है या कोई व्यक्ति स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुका है, तो ऐसी प्रविष्टियों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने घुसपैठियों और अपात्र लोगों को मतदान का अधिकार दिए जाने पर सवाल उठाया।
राजनीतिक बहस के केंद्र में SIR
SIR को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री धामी का यह बयान उत्तराखंड की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर भाजपा मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया को चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका जता रहा है।
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से जुड़े विवरण सार्वजनिक किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने के आसार हैं।