रामनगर, नैनीताल | 12 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में मां गिरिजा देवी मंदिर के निकट कोसी नदी के तट पर पहली बार भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 की शाम आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की नदियां केवल जल की धारा नहीं हैं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जनजीवन की जीवन रेखा हैं। उन्होंने नदियों की स्वच्छता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कोसी नदी के तट पर पहली बार हुई भव्य महाआरती
रामनगर के प्रसिद्ध गिरिजा देवी मंदिर के समीप कोसी नदी के तट पर आयोजित इस महाआरती को धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हरिद्वार की हरकी पैड़ी और ऋषिकेश में होने वाली गंगा आरती की तर्ज पर इस आयोजन की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य मां कोसी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देना है।
स्थानीय आयोजक मदन जोशी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कोसी नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान और आरती के माध्यम से आस्था का वातावरण बना। इस आयोजन से रामनगर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया आध्यात्मिक अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किया गया है।
सीएम धामी ने नदियों को बताया सभ्यता और संस्कृति की जीवन रेखा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी गहरी धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। यहां की नदियां लोगों के जीवन, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मां कोसी का जनजीवन में विशेष महत्व है और मां गिरिजा देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था प्रदेश की धार्मिक परंपराओं को और समृद्ध बनाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी नदी के पावन तट पर आयोजित महाआरती केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और नदियों की स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदियों की पवित्रता बनाए रखने के लिए आगे आएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखें।
उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, सामाजिक सद्भाव बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
कोसी नदी पर महाआरती के आयोजन के साथ नदी संरक्षण का विषय भी प्रमुखता से सामने आया। नदियां पेयजल, कृषि, जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके प्रदूषित होने से पर्यावरण और मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में नदियों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में नदियों की निर्मलता बनाए रखने और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोसी नदी के तट से प्रेम, सद्भाव, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश पूरे प्रदेश में पहुंचना चाहिए।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
रामनगर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां स्थित गिरिजा देवी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसके आसपास का प्राकृतिक वातावरण और कोसी नदी का तट इस क्षेत्र को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।
कोसी नदी पर महाआरती की शुरुआत से रामनगर के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यदि इस आयोजन को नियमित रूप दिया जाता है, तो स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ कॉर्बेट नेशनल पार्क और रामनगर घूमने आने वाले पर्यटक भी इससे जुड़ सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। हालांकि, महाआरती को नियमित रूप से आयोजित करने के संबंध में किसी आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।
स्थानीय स्तर पर धार्मिक परंपराओं को नई पहचान
कोसी नदी पर पहली बार आयोजित महाआरती को रामनगर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय धार्मिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने और नदी के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने आयोजन से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी लोगों को प्रेरित करेंगे।
निष्कर्ष: कोसी नदी पर पहली बार आयोजित महाआरती रामनगर के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संदेश ने इस आयोजन को नदी संरक्षण, स्वच्छता और आध्यात्मिक पर्यटन से भी जोड़ा है। अब इस पहल से स्थानीय धार्मिक पर्यटन को कितना प्रोत्साहन मिलता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।