उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के माध्यम से दूसरा मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से जिले में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने और मेडिकल शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में आयोजित धामी मंत्रिमंडल की बैठक में स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में कुल 13 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इनमें हरिद्वार में ईएसआई के माध्यम से मेडिकल कॉलेज संचालित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी शामिल रहा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि हरिद्वार में पहले से एक मेडिकल कॉलेज संचालित है। अब ईएसआई के माध्यम से एक और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है।
ईएसआई मेडिकल कॉलेज से क्या होगा फायदा?
हरिद्वार में नए ईएसआई मेडिकल कॉलेज की स्थापना से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं, दोनों को लाभ मिलने की संभावना है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की स्वास्थ्य व्यवस्था मुख्य रूप से पात्र बीमित कर्मचारियों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़ी है।
हरिद्वार एक प्रमुख औद्योगिक जिला है, जहां सिडकुल समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में ईएसआई से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए मेडिकल कॉलेज के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। हालांकि, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का वास्तविक विस्तार कॉलेज की संचालन योजना और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगा।
50 एमबीबीएस सीटों से शुरू होने की योजना
जागरण की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार में प्रस्तावित ईएसआई मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक बैच में 50 एमबीबीएस विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना को मंजूरी मिली है। कॉलेज को मौजूदा ईएसआई अस्पताल के बुनियादी ढांचे और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए शुरू करने की योजना बताई गई है।
इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। साथ ही, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बीच समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
श्रमिकों और उनके परिवारों को मिल सकती है राहत
हरिद्वार में औद्योगिक इकाइयों की बड़ी संख्या के कारण कर्मचारियों के लिए समय पर और बेहतर इलाज की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ईएसआई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में उठाया गया यह कदम भविष्य में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार में मददगार हो सकता है। इससे चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं भी बनेंगी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने का अर्थ कॉलेज का तत्काल संचालन शुरू होना नहीं है। इसके लिए आगे की प्रशासनिक, निर्माण और संचालन संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
भूमि हस्तांतरण की मंजूरी के बाद अगला कदम
कैबिनेट से 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। अब जमीन हस्तांतरण, संस्थान की व्यवस्थाओं और संचालन से संबंधित आगामी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
फिलहाल, इस निर्णय से हरिद्वार में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना की अगली प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और विद्यार्थियों के प्रवेश तथा अस्पताल की सुविधाओं को लेकर आगे क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है।