देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और गड्ढामुक्त अभियान की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब खुद सड़क पर उतरकर निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सड़कों की मरम्मत में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा है कि यदि निरीक्षण के दौरान सड़कें खराब मिलीं या मरम्मत कार्यों में लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अमर उजाला की 14 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 15 अक्टूबर के बाद कभी भी सड़क मार्ग से यात्रा कर सड़कों की स्थिति का औचक निरीक्षण करने की बात कही थी। वहीं, 18 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में सड़क सुधार कार्यों की समीक्षा और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में अधिकारियों द्वारा किए जा रहे निरीक्षणों की जानकारी दी गई है।
आज मुख्यमंत्री धामी कहां जाएंगे?
18 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री के निरीक्षण के लिए किसी निश्चित शहर, सड़क या मार्ग का स्पष्ट और स्वतंत्र रूप से सत्यापित कार्यक्रम उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि मुख्यमंत्री आज किसी विशेष स्थान पर जाएंगे।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने पहले ही अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे मानसून से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और सुधारीकरण के कार्यों को प्राथमिकता दें। उनके प्रस्तावित औचक निरीक्षण का उद्देश्य सड़कों की जमीनी स्थिति देखना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
18 अक्टूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए 18 अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की थी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भी निरीक्षण अभियान तेज किया।
भारत न्यूज इंटरनेशनल की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने सुबह छह बजे से देहरादून के प्रमुख मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क सुधार कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को तय समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण में कालीदास रोड टर्न, कैनाल रोड, नागल, मसूरी डायवर्जन, सहस्रधारा तिराहा, लाडपुर, जोगीवाला, रिस्पना पुल, घंटाघर, चकराता रोड और गढ़ी कैंट सहित प्रमुख स्थान शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने समीक्षा बैठकों में जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में सड़कों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- मानसून से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए।
- सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की नियमित जांच हो।
- जिलाधिकारी अपने क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति की निगरानी करें।
- अधूरे कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए।
- लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
सीवर और पेयजल पाइपलाइन से खराब हुई सड़कों पर भी नजर
सड़क मरम्मत के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने सीवर और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की स्थिति पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। ऐसी सड़कों पर काम अधूरा रहने से आम लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अधूरे कार्यों को समय पर पूरा किया जाए। 13 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक के संबंध में पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पाइपलाइन से जुड़े अधूरे कार्यों को एक नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य भी दिया गया था।
आम जनता को मिलेगी राहत
उत्तराखंड में सड़कों की खराब स्थिति लंबे समय से आम नागरिकों, यात्रियों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। इसके अलावा, खराब सड़कें यातायात की गति को प्रभावित करती हैं और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
यदि निर्धारित समयसीमा में मरम्मत कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे होते हैं, तो इससे आम जनता को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री का प्रस्तावित औचक निरीक्षण भी इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि अधिकारियों के दावों और सड़कों की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर का पता लगाया जा सके।