मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा अब तक उपलब्धियों से परिपूर्ण रही है। यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और सतत प्रगति की एक प्रेरणादायी गाथा है। राज्य आंदोलन की मूल भावना उत्तराखण्ड के समग्र एवं संतुलित विकास पर आधारित रही है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए पारदर्शिता, जन-सहभागिता और नई कार्यसंस्कृति के साथ विकास की एक नई दिशा तय की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पर्यटन, कृषि, बागवानी और पशुपालन जैसे संभावनाशील क्षेत्रों में किए गए नवाचारी और दूरदर्शी प्रयासों से उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान प्राप्त हुई है। विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का परिणाम है कि आज देश के अन्य राज्य भी उत्तराखण्ड की नीतियों और कार्यक्रमों से प्रेरणा ले रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार ने जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और त्वरित निर्णय हमारी सरकार की कार्यशैली के प्रमुख आधार रहे हैं।

 

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता, सशक्त भू-कानून, नकल-रोधी कानून तथा धर्मांतरण के विरुद्ध कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से राज्य में न्याय, अनुशासन, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ किया गया है। देवतुल्य जनता के विश्वास और सहयोग से विगत चार वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार, महिलाओं का सशक्तिकरण, किसानों की आय में वृद्धि तथा गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण हेतु अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू की गई हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-अपेक्षाओं के अनुरूप सुनियोजित और त्वरित विकास की दिशा तय करने में सरकार सफल रही है। अनेक क्षेत्रों में राज्यहित से जुड़े कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में अपेक्षा से बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। नीति आयोग द्वारा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचारों की सराहना की गई है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड को सतत विकास सूचकांक में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

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