देहरादून: उत्तराखंड के नवनियुक्त चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे बिना किसी पूर्व प्रोटोकॉल और तामझाम के चुपचाप राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Doon Hospital) पहुंच गए।

मरीजों के बीच कतार में खड़े हुए मंत्री
  • फिल्मी अंदाज में एंट्री: मंत्री उनियाल ने अधिकारियों को भनक लगे बिना एक सामान्य नागरिक की तरह अस्पताल में प्रवेश किया।
  • ग्राउंड जीरो पर फीडबैक: मरीजों की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए वे स्वयं टीकाकरण केंद्र और लैब रिपोर्टिंग सेंटर की कतार में जाकर खड़े हो गए।
  • सुरक्षाकर्मियों की सूचना: मंत्री को कतार में खड़ा देख वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पहचान लिया और तुरंत वॉकी-टॉकी के जरिए अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी।
अस्पताल प्रशासन में मची खलबली
सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। प्राचार्य डॉ. गीता जैन अपनी ओपीडी छोड़कर आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं। मंत्री ने इस दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों का भ्रमण किया और उपचाराधीन मरीजों व उनके तीमारदारों से बातचीत कर दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का फीडबैक लिया।
फायर एनओसी और व्यवस्थाओं पर कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलने पर सुबोध उनियाल ने सख्त रुख अपनाया:
  • फायर एनओसी पर नाराजगी: अस्पताल में फायर एनओसी (No Objection Certificate) न होने पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
  • तत्काल कार्रवाई: उन्होंने मौके से ही आईजी फायर सर्विस को फोन कर जल्द से जल्द एनओसी की प्रक्रिया पूरी करने और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के निर्देश दिए।
  • लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट किया कि मरीजों की सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पलायन रोकने के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा जरूरी
मीडिया से बातचीत में मंत्री उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन की एक बड़ी वजह स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने संकल्प लिया कि स्वास्थ्य सेक्टर में मौजूद चुनौतियों को पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ दूर कर प्रदेश में सस्ती, सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

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