मुंबई/नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तीन दिवसीय भारत यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच मुंबई के ‘लोक भवन’ में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (Special Global Strategic Partnership) के रूप में अपग्रेड करने की घोषणा की है।
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण ₹3.25 लाख करोड़ से लेकर ₹4 लाख करोड़ तक का वह रक्षा महासमझौता है, जो भारतीय वायुसेना और नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
रक्षा समझौतों का मुख्य विवरण (Deal Summary):
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मौजूदगी में रक्षा क्षेत्र में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:
- 114 राफेल लड़ाकू विमान (MRFA प्रोजेक्ट): भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल जेट का रास्ता साफ हो गया है। इसमें से 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
- हैमर (HAMMER) मिसाइलों का स्वदेशी निर्माण: भारत की BEL और फ्रांस की सफ़रान (Safran) के बीच एक जॉइंट वेंचर हुआ है, जिसके तहत अब घातक हैमर मिसाइलें भारत में ही बनेंगी।
- स्कॉर्पीन पनडुब्बी और जेट इंजन: हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ रोकने के लिए 3 नई स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों पर बातचीत आगे बढ़ी है। साथ ही, सफ़रान कंपनी भारत के ‘तेजस’ और भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए इंजन तकनीक का 100% ट्रांसफर करने पर सहमत हुई है।
- हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन: कर्नाटक के वेमगल में Airbus H125 हेलीकॉप्टर बनाने के लिए टाटा और एयरबस की जॉइंट असेंबली लाइन का वर्चुअली उद्घाटन किया गया।
यात्रा के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- इनोवेशन का साल 2026: दोनों नेताओं ने 17 फरवरी को मुंबई में ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ (India-France Year of Innovation) का उद्घाटन किया।
- AI इम्पैक्ट समिट: राष्ट्रपति मैक्रों दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026 में भी हिस्सा लेंगे, जहाँ भविष्य की तकनीक और डिजिटल गवर्नेंस पर चर्चा होगी।
- रणनीतिक सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया है।
निष्कर्ष:
राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा न केवल रक्षा सौदों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक नई धुरी के रूप में उभरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को “वैश्विक स्थिरता का बल” बताया है।
राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा न केवल रक्षा सौदों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक नई धुरी के रूप में उभरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को “वैश्विक स्थिरता का बल” बताया है।