ईरान ने भारत को बड़ी कूटनीतिक राहत देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते दो भारतीय एलपीजी (LPG) गैस टैंकरों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दे दी है। यह खबर 13 और 14 मार्च 2026 की है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की संभावित किल्लत को लेकर चिंता बनी हुई थी
मुख्य विवरण (Key Details):
- टैंकरों के नाम: ईरान ने मुख्य रूप से ‘पुष्पक’ (Pushpak) और ‘परिमल’ (Parimal) नामक भारतीय जहाजों को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की मंजूरी दी है। इसके अलावा, ‘शिवालिक’ (Shivalik) नामक एक टैंकर 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर इस रास्ते से निकल चुका है।
- राजनयिक प्रयास: यह सफलता भारत के विदेश मंत्री
और ईरान के विदेश मंत्री
सैयद अब्बास अराघचीके बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से इस संबंध में फोन पर चर्चा की थी।
- महत्व: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का काफी हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
- सुरक्षित मार्ग: भारत में ईरान के राजदूत,
मोहम्मद फतहाली
ने पुष्टि की कि भारत और ईरान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों के कारण भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दिया गया है।
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ताजा स्थिति (Current Status):
- मुंबई पहुंचा पहला जहाज: ईरान और इजरायल/अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पहला गैस टैंकर मुंबई पहुंच चुका है, जिससे देश में गैस आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद है।
- सऊदी अरब से तेल: एलपीजी टैंकरों के साथ-साथ, सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा एक और भारतीय टैंकर भी शनिवार (14 मार्च 2026) तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
- फंसे हुए जहाज: हालांकि भारत के लिए रास्ता खुला है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार अभी भी कुछ भारतीय जहाज होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए बातचीत जारी है।