उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के रतन सिंह सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में खबरों के लिटिल मास्टर’ प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। अमर उजाला द्वारा आयोजित इस कुमाऊं/मंडल स्तरीय न्यूज रीडिंग प्रतियोगिता में बच्चों के उत्साह और कौशल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जीबी पंत विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में भाषाई कौशल और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना था। राज्यपाल के सभागार में प्रवेश करते ही उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

प्रतियोगिता के शीर्ष विजेता:
प्रतियोगिता के कड़े मुकाबले के बाद राज्यपाल ने निम्नलिखित विजेताओं को पुरस्कृत किया:
  • दीपांशु गहतोड़ी: प्रथम स्थान
  • दिव्यम अग्रवाल: द्वितीय स्थान
  • यथार्थ मेहरा: तृतीय स्थान

विजेताओं को राज्यपाल द्वारा मांग ड्राफ्ट (Demand Draft) और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया

राज्यपाल का संबोधन: ‘रील्स नहीं, रीडिंग’ पर जोर
अपने प्रेरक संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बच्चों को भविष्य का नागरिक बताते हुए “पढ़ने की कला” (Reading habit) विकसित करने का आह्वान किया। उनके संबोधन की मुख्य बातें:
  • पढ़ने की आदत: उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया रील्स से अधूरा ज्ञान मिलता है। वास्तविक ज्ञान और आत्म-विकास के लिए समाचार पत्र और पुस्तकें पढ़ने की आदत डालना अनिवार्य है।
  • हिंदी का महत्व: राज्यपाल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उनकी पत्नी ने उन्हें हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “भारत की आत्मा” से जुड़ने के लिए हिंदी पढ़ना और उसमें संवाद करना आवश्यक है।
  • तकनीक का संतुलन: उन्होंने मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों को इनसे मुक्त होकर मौलिक ज्ञान की ओर बढ़ने की सलाह दी।
समारोह की झलकियां
कार्यक्रम के दौरान सभागार खचाखच भरा रहा। राज्यपाल ने अपने भाषण में राष्ट्र की एकता और गौरवशाली इतिहास (मुगल और अंग्रेजी शासन का संदर्भ) का भी उल्लेख किया, जिसे सुनकर छात्रों और अभिभावकों ने जमकर तालियां बजाईं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति, शिक्षाविद और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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