ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद, अब ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों (पंचायत घरों) के निर्माण के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि को दोगुना करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
राज्य गठन के ढाई दशक बाद भी प्रदेश की लगभग 803 ग्राम पंचायतों के पास अपना कोई व्यवस्थित पंचायत घर नहीं है। पुराने मानकों के आधार पर मिलने वाली धनराशि आधुनिक सुविधाओं वाले भवन निर्माण के लिए अपर्याप्त साबित हो रही थी। इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पंचायत विभाग को बजट बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
प्रस्ताव की मुख्य बातें:
  • दोगुनी राशि: पंचायत विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, अब नए पंचायत भवनों के निर्माण के लिए आवंटित बजट को वर्तमान राशि से सीधा दोगुना कर दिया जाएगा।
  • वित्त विभाग को भेजा गया प्रस्ताव: विभाग द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव शासन के माध्यम से वित्त विभाग को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
  • कैबिनेट की मुहर जल्द: वित्त विभाग से वित्तीय अनुमति मिलते ही इसे अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
पंचायत भवनों के आधुनिक होने से ग्रामीणों को कई सरकारी सुविधाओं के लिए तहसील या जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इन भवनों में:
  1. पंचायत सचिवालय: सभी प्रशासनिक कार्य एक ही छत के नीचे होंगे।
  2. डिजिटल सेवा: इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा से लैस होने पर आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे कार्य ग्राम स्तर पर ही संभव होंगे।
  3. बैठकों के लिए स्थान: ग्राम सभा और अन्य विकास कार्यों की चर्चा के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा।
निष्कर्ष:
सरकार का यह कदम ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ‘डिजिटल विलेज’ के सपने को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। जिन पंचायतों में भूमि विवाद के कारण निर्माण रुका हुआ था, वहां भी सरकार अब विशेष प्रावधानों के तहत कार्य शुरू करने की योजना बना रही है।

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