टनकपुर (चंपावत): उत्तराखंड की धामी सरकार ने उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां पूर्णागिरि धाम के कायाकल्प के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुसार, अब केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर

पूर्णागिरि धाम

का भी भव्य और व्यवस्थित विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना और स्थानीय पर्यटन को नई ऊंचाई देना है.

शारदा और गोल्ज्यू कॉरिडोर से बदलेगी सूरत
हाल ही में मुख्यमंत्री ने चंपावत दौरे के दौरान घोषणा की है कि पूर्णागिरि धाम को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए मुख्य आकर्षण शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर होंगे, जिन पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है.
  • शारदा कॉरिडोर: मां पूर्णागिरि के चरणों में बहने वाली शारदा नदी के तटों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
  • रोपवे की सुविधा: श्रद्धालुओं की कठिन चढ़ाई को सुगम बनाने के लिए रोपवे निर्माण की योजना पर कार्य चल रहा है, जिससे मंदिर तक पहुंचना और भी आसान हो जाएगा.
12 महीने चलेगी यात्रा, करोड़ों का बजट स्वीकृत
सरकार ने पूर्णागिरि मेले को केवल मौसमी न रखकर ‘वर्षभर की यात्रा’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए किरोड़ा नाले पर पुल निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे बरसात के मौसम में भी यात्रा बाधित नहीं होगी.
  • सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 3300 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया है.
  • श्रद्धालुओं के रुकने के लिए आधुनिक धर्मशालाएं, पार्किंग और डिजिटल कनेक्टिविटी की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री का विजन: आस्था और विकास का संगम
27 फरवरी 2026 को पूर्णागिरि मेले के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों को मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत जोड़ा जा रहा है. पूर्णागिरि धाम इस मिशन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस मास्टर प्लान के पूरा होने के बाद, चंपावत जिला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा.

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