पिथौरागढ़ की 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए अपहरण, दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मुख्य आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बरी किए जाने के फैसले ने पूरे कुमाऊँ में जनाक्रोश भड़का दिया है। बेरीनाग में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और मासूम को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च निकाली। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दोषियों को फांसी की सजा नहीं दी गई, तो ये आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा।बीते सोमवार को देर शाम पिथौरागढ़ की नन्ही परी केस को रीओपन कराए जाने की मांग को लेकर लोनिवि अतिथि गृह से शुरू हुआ कैंडल मार्च शहीद चौक तक पहुंचा। इस कैंडल मार्च में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा, व्यापारी, कर्मचारी संगठन, पूर्व सैनिक और विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। लोग हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लिए नारेबाजी करते आगे बढ़े। पूरा क्षेत्र “न्याय दो… न्याय दो… बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं…” के नारों से गूंज उठा। जनता का कहना है कि जब तक बच्ची के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।जनता का कहना है सरकार को तत्काल सुप्रीम कोर्ट में नन्ही परी केस को दोबारा खोलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दरिंदों को फांसी की सजा नहीं दी गई, तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा। बेरीनाग के साथ गंगोलीहाट में भी विभिन्न संगठनों ने कैंडल मार्च निकालकर मासूम बच्ची को न्याय दिलाने की मांग की। वहां भी लोगों ने एक स्वर में कहा कि ऐसी दरिंदगी करने वालों को फांसी से कम सजा स्वीकार्य नहीं है।गौरतलब हो कि 20 नवंबर 2014 को काठगोदाम (हल्द्वानी) से छह वर्षीय मासूम अपने परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल होने पिथौरागढ़ आई हुई थी। इसी दौरान बच्ची अचानक लापता हो गई। छह दिन तक तलाश जारी रही, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला, फिर सातवें दिन उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। इस घटना के आठ दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।

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