दून उद्योग व्यापार मंडल की पदाधिकारियों ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में मंडल ने साफ़ किया कि 11 जनवरी के उत्तराखंड बंद में वह सम्मिलित नहीं है। मंडल का कहना है कि सीबीआई जांच पर मुख्यमंत्री धामी की संस्तुति और विधिक कार्रवाई हो चुकी है। उसके बाद उत्तराखंड बंद औचित्यहीन और राजनीति से प्रेरित है।मंडल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के सिलसिले में 11 जनवरी को राजनीतिक दलों द्वारा बुलाए गए उत्तराखंड बंद के संबंध में, मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार की मांगों को मानते हुए पहले ही CBI जांच की सिफारिश कर दी है, और कानूनी कार्रवाई भी की गई है। मंडल ने आगे कहा कि दोषियों को उम्रकैद की सज़ा हो चुकी है, और इन सबके बाद, एक बेवजह और राजनीतिक मकसद से बंद बुलाना सिर्फ़ कारोबारी समुदाय को नुकसान पहुंचाने के लिए है। सभी व्यापारियों ने इसका विरोध किया है।किसी भी संगठन ने अपनी बात रखने के लिए उद्योग व्यापार मंडल से संपर्क नहीं किया है, न ही उन्होंने कोई मदद मांगी है। इसके बजाय, वे सिर्फ़ तानाशाही फ़रमान जारी कर रहे हैं और व्यापारियों को डरा-धमका रहे हैं। अगर किसी भी व्यापारी को परेशान किया गया, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। व्यापार मंडल ने कहा व्यापारियों की सुरक्षा की मांग के लिए एसएसपी से संपर्क किया जाएगा और पुलिस से अनुरोध किया जाएगा कि शांति भंग करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि देहरादून का शांतिपूर्ण माहौल खराब न हो।व्यापार मंडल का कहना है कि उनका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है और रही बात अंकिता भंडारी हत्याकांड की तो उस पर सभी आरोपी जेल में हैं और हाल ही में जो प्रदेश के अन्दर उक्त कांड में CBI जांच की मांग चल रही थी उस पर भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता पिता से मिलकर उनका पक्ष जाना और सीबीआई जांच को स्वीकार कर लिया है। ऐसी स्थिति में व्यापार और व्यापारी का कोई नुकसान ना हो अत: देहरादून के अन्दर जितने भी बाजार हैं फिर चाहे व संडे बाजार ही क्यूं ना हो वह नियानयमानुसार चलते रहेंगे व खुले रहेंगे।