देहरादून | 18 फरवरी 2026
भारत की बहुप्रतीक्षित 16वीं जनगणना को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में इस बार देश की पहली पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना होने जा रही है। हालांकि देशभर में जनसंख्या गणना का मुख्य कार्य अगले साल 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होगा, लेकिन उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य के 131 दुर्गम गांवों और 3 कस्बों में यह प्रक्रिया इसी साल सितंबर 2026 में शुरू कर दी जाएगी।

डिजिटल जनगणना: कागज नहीं, अब मोबाइल ऐप से होगा काम
इस बार की जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह पेपरलेस होगी। प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने के लिए पेन-कागज के बजाय मोबाइल ऐप और टैबलेट का उपयोग करेंगे।

  • तेजी और शुद्धता: डिजिटल माध्यम से डेटा सीधे पोर्टल पर अपडेट होगा, जिससे अंतिम आंकड़ों के विश्लेषण में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
  • स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों के पास वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भरने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
उत्तराखंड में ‘अगेती जनगणना’ क्यों?
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में फरवरी के दौरान आवाजाही कठिन होती है। इसी “Snow-bound” श्रेणी को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने प्रावधान किया है कि राज्य के चिन्हित 131 गांवों और 3 विशेष कस्बों में गणना का काम इसी साल सितंबर-अक्टूबर में पूरा कर लिया जाए। इसके लिए संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि शेष भारत के लिए यह 1 मार्च 2027 होगी।

प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारी
राज्य के जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, गणना के लिए प्रदेश को लगभग 30,000 हिस्सों (Enumeration Blocks) में बांटा गया है।

  • प्रशिक्षण: फील्ड स्टाफ और सुपरवाइजरों को डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
  • सीमाएं सील: जनगणना नियमों के तहत अधिसूचना जारी होते ही राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को ‘सील’ मान लिया गया है, यानी अब जनगणना पूरी होने तक नए जिलों या तहसीलों के गठन पर रोक रहेगी।
इस बार क्या होगा खास?
इस डिजिटल जनगणना में न केवल जनसंख्या बल्कि आवास की स्थिति, संपत्तियां, डिजिटल पहुंच और पहली बार जातिगत डेटा (Caste Enumeration) भी शामिल किए जाने की संभावना है। इसके लिए केंद्र ने करीब ₹11,718 करोड़ का बजट आवंटित किया है।

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