देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में सरकार ने ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ को धरातल पर उतार दिया है, जिसमें पात्र महिलाओं को परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत की भारी सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, अब सरकार अगले वित्तीय वर्ष से बुजुर्ग महिलाओं के कल्याण के लिए एक और विशेष योजना शुरू करने की योजना बना रही है।
एकल महिला स्वरोजगार योजना: आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में मुख्य सेवक सदन में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- पात्रता: योजना का लाभ 21 से 50 वर्ष की आयु की अविवाहित, तलाकशुदा, परित्यक्ता, विधवा और निराश्रित महिलाओं को मिलेगा। इसके अलावा, एसिड अटैक पीड़ित और ट्रांसजेंडर भी इसके पात्र हैं।
- वित्तीय सहायता: महिलाओं को अपना खुद का व्यवसाय या सूक्ष्म उद्यम शुरू करने के लिए ₹2 लाख तक की परियोजना स्वीकृत की जाएगी।
- 75% सब्सिडी: स्वीकृत परियोजना लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में देगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत लाभार्थी को स्वयं या ऋण के माध्यम से वहन करना होगा।
- सीधा लाभ: पहले चरण में प्रदेश की सैकड़ों महिलाओं के खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पहली किस्त की धनराशि ट्रांसफर की जा चुकी है
बुजुर्ग महिलाओं के लिए नई योजना की तैयारी
सूत्रों और सरकारी संकेतों के अनुसार, आगामी वित्तीय वर्ष से प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं प्रस्तावित हैं। वर्तमान में राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना संचालित है, जिसमें मासिक सहायता को बढ़ाकर ₹1500 कर दिया गया है। अब नई योजना का फोकस बुजुर्ग महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा, पोषण और एकाकीपन को दूर करने के लिए सामुदायिक केंद्रों या विशेष सहायता प्रणालियों पर हो सकता है।
महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के अनुसार, सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल लाभार्थी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाकर ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को पूरा करना है। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।