देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने हाल ही में आयोजित एक महोत्सव की सराहना करते हुए इसे राज्य की प्रकृति, समृद्ध परंपरा और विकास की यात्रा का एक अद्भुत संगम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
संस्कृति और संरक्षण पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि के रूप में पहचान इसकी अद्वितीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे पारंपरिक त्योहार राज्य के सामाजिक ढांचे को मजबूत करते हैं। उनके अनुसार, “यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रगतिशील सोच और विरासत के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक है।”
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि के रूप में पहचान इसकी अद्वितीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे पारंपरिक त्योहार राज्य के सामाजिक ढांचे को मजबूत करते हैं। उनके अनुसार, “यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रगतिशील सोच और विरासत के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक है।”
प्रगति की ओर बढ़ते कदम
राज्यपाल ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर उत्तराखंड आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक उन्नति की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर हमें अपनी पारिस्थितिकी (ecology) और स्थानीय परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित करना होगा।
राज्यपाल ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर उत्तराखंड आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक उन्नति की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर हमें अपनी पारिस्थितिकी (ecology) और स्थानीय परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित करना होगा।
प्रमुख बिंदु:
- प्रकृति का सम्मान: महोत्सव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश।
- सांस्कृतिक धरोहर: स्थानीय लोक कला और संगीत को बढ़ावा देने का आह्वान।
- भविष्य की दृष्टि: परंपरा को आधुनिक प्रगति के साथ जोड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा।
इस अवसर पर विभिन्न स्थानीय कलाकारों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम की रौनक और बढ़ गई। राज्यपाल के इस संदेश ने स्थानीय समुदायों में उत्साह भर दिया है, जो अपनी संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।