देहरादून | 18 फरवरी 2026
राजधानी में आयोजित विश्वमांगल्य सभा के ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। मंगलवार को आयोजित इस समागम में आधुनिक युग की चुनौतियों और उसमें मातृ शक्ति की निर्णायक भूमिका पर गंभीर मंथन किया गया। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की और समाज निर्माण में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया।
संस्कारों की पहली पाठशाला है माता: CM धामी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “माता ही हमारे संस्कारों की असली निर्माता होती है। एक बालक के जीवन में जो नींव पड़ती है, वह उसकी मां के द्वारा दिए गए संस्कारों से ही आती है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि समाज और राष्ट्र को उन्नति के शिखर पर ले जाना है, तो मातृ शक्ति का सशक्त और संस्कारवान होना अनिवार्य है।
आधुनिक चुनौतियों के बीच ‘विजनरी’ होना जरूरी
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने वर्तमान पीढ़ी के सामने खड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
  • तकनीकी बदलाव और आधुनिकता: वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में तकनीक और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण बच्चों को सही दिशा देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
  • विजनरी विजन: चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि आज की माता को केवल पारंपरिक भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे ‘विजनरी’ होना होगा। उसे भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए बच्चों को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाना होगा।
  • परिवार से राष्ट्र का निर्माण: समागम का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि जब एक परिवार संस्कारित होता है, तभी एक अच्छे समाज और अंततः एक गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण संभव है।
मातृ शक्ति का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। विश्वमांगल्य सभा की पदाधिकारियों ने बताया कि इस समागम का उद्देश्य आधुनिकता के शोर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मातृ मूल्यों को फिर से जीवित करना है।

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