देहरादून: उत्तराखंड में सार्वजनिक जुआ और सट्टेबाजी को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड सार्वजनिक जुआ निवारण विधेयक, 2026’ (Uttarakhand Public Gambling Prevention Bill, 2026) को मंजूरी दे दी गई है। यह नया कानून आजादी के पहले के 1867 के पुराने अधिनियम की जगह लेगा।

नए कानून के तहत कठोर सजा के प्रावधान
धामी सरकार द्वारा लाए गए इस नए कानून में अपराधियों के लिए भारी दंड का प्रावधान किया गया है:
  • जेल की सजा: सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने या सट्टा लगाने के दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल तक का कारावास हो सकता है। 1.3.1
  • आर्थिक दंड: जेल की सजा के साथ-साथ दोषी पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 1.1.1
  • जुआरियों के अड्डे पर कार्रवाई: सामान्य जुआ घर (Common Gambling House) चलाने वालों या उनमें शामिल होने वालों के खिलाफ भी अब पुलिस को पहले से अधिक अधिकार दिए गए हैं।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि 1867 का पुराना कानून मौजूदा समय की चुनौतियों, विशेषकर डिजिटल युग की सट्टेबाजी और संगठित जुआ गिरोहों से निपटने में सक्षम नहीं था। गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में, उत्तराखंड सरकार ने राज्य की शांति और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया है।
ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी पर भी नजर
यह विधेयक न केवल शारीरिक रूप से खेले जाने वाले जुए बल्कि खेलों पर लगने वाली सट्टेबाजी (Betting) को भी अपराध की श्रेणी में रखता है। राज्य सरकार का उद्देश्य उन सभी गतिविधियों को रोकना है जो समाज में नशे और अपराध को बढ़ावा देती हैं।

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