देहरादून में 10 मार्च 2026 को तिब्बती समुदाय ने 67वें राष्ट्रीय विद्रोह दिवस (Tibetan National Uprising Day) के अवसर पर चीन के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘फ्री तिब्बत’ और ‘तिब्बत की आजादी’ जैसे नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की

यहाँ इस घटना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

  • प्रदर्शन का कारण: यह विरोध प्रदर्शन 10 मार्च 1959 को ल्हासा में चीनी शासन के खिलाफ हुए ऐतिहासिक विद्रोह की याद में आयोजित किया गया था。
  • स्थान और मार्ग: रैली परेड ग्राउंड से शुरू हुई और बुद्धा चौक, दून अस्पताल चौक, दर्शनलाल चौक से होते हुए वापस परेड ग्राउंड पर समाप्त हुई। इसके अतिरिक्त, देहरादून के हर्बर्टपुर और मसूरी के हैप्पी वैली क्षेत्र में भी विरोध रैलियां निकाली गईं।
  • नारेबाजी और मांगें: प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और झंडे थे, जिन पर “चीन तिब्बत छोड़ो”“फ्री तिब्बत”, और “तिब्बत की आजादी, भारत की सुरक्षा” जैसे नारे लिखे थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) से तिब्बत संकट को हल करने और दलाई लामा के प्रतिनिधियों की रिहाई की मांग की।
  • प्रमुख मुद्दे: तिब्बती समुदाय के नेताओं ने आरोप लगाया कि चीन तिब्बत में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, धार्मिक स्वतंत्रता का हनन कर रहा है और वहां की सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही तिब्बत में बड़े बांधों के निर्माण से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान पर भी चिंता जताई गई।
  • प्रतिभागी: इस रैली में तिब्बतन सेटलमेंट, रीजनल तिब्बतन यूथ कांग्रेस और तिब्बती महिला संगठन के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्थानीय तिब्बती निवासियों ने भाग लिया।
सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन ने पूरे प्रदर्शन के दौरान परेड ग्राउंड और बाजार क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

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