देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के समग्र विकास और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में एक नई विज़न योजना पेश की है, जिसे ‘SANTULAN’ (संतुलन) मॉडल का नाम दिया गया है। इस मॉडल के तहत सरकार ने विशेष रूप से ‘L’ यानी ‘Livelihood’ (आजीविका) स्तंभ पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर मिल सकें।
क्या है ‘SANTULAN’ मॉडल?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के विकास को आठ प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया है, जिसे ‘SANTULAN’ नाम दिया गया है:
- S: सतत विकास (Sustainable Development)
- A: कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (Agriculture & Allied Sector)
- N: नूतन कौशल एवं तकनीक (New Age Skills & Technology)
- T: पर्यटन (Tourism)
- U: नगरीय एवं आधारभूत ढांचा (Urban & Infrastructure)
- L: आजीविका (Livelihood)
- A: आयुष एवं वेलनेस (AYUSH & Wellness)
- N: नारी शक्ति (Nari Shakti)
आजीविका (Livelihood) स्तंभ और ₹60 करोड़ का निवेश
बजट में ‘L’ (Livelihood) स्तंभ के अंतर्गत मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। यह कदम राज्य से होने वाले पलायन को रोकने और युवाओं को ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
योजना की मुख्य विशेषताएं:
- युवाओं को प्रोत्साहन: यह राशि उन हजारों युवाओं के लिए मददगार साबित होगी जो अपने गांव या शहर में रहकर खुद का छोटा उद्योग (Manufacturing) या सेवा क्षेत्र (Service Sector) का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
- विविध अवसर: इसके तहत डेयरी, हस्तशिल्प, पर्यटन गाइड, होमस्टे और छोटे विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- आर्थिक मजबूती: 60 करोड़ के इस फंड से युवाओं को सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं के माध्यम से तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
पलायन रोकने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में ‘आजीविका’ पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है। बजट का यह प्रावधान उन युवाओं के लिए ‘उम्मीद की किरण’ है, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को देखते हुए, यह निवेश राज्य की जीडीपी (GSDP) को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।