देहरादून | मार्च 12, 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसों के संचालन और उनमें दी जाने वाली शिक्षा को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा के विशेष सत्र और विभिन्न सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार राज्य में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और कट्टरपंथ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
मुख्य बिंदु और सीएम का बयान
  • मदरसा शब्द से आपत्ति नहीं: सीएम धामी ने कहा, “हमें ‘मदरसा’ शब्द से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हमें आपत्ति उन लोगों से है जो इन्हें ‘आतंक की फैक्ट्री’ की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं”।
  • राष्ट्रविरोधी तत्वों पर प्रहार: उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी संस्थान राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या आतंकवाद को बढ़ावा देंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का लक्ष्य कट्टरपंथी धार्मिक शिक्षा के बजाय ‘मूल्य-आधारित और आधुनिक राष्ट्रवादी शिक्षा’ प्रदान करना है।
  • मदरसा बोर्ड होगा समाप्त: उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 1 जुलाई 2026 से राज्य के ‘मदरसा बोर्ड’ को पूरी तरह समाप्त करने का ऐलान किया है।
  • नया शिक्षा ढांचा: अब सभी मदरसे और अल्पसंख्यक स्कूल ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के दायरे में आएंगे। उन्हें राज्य शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और सरकारी पाठ्यक्रम (NCERT) लागू करना होगा।
अवैध मदरसों पर ‘बुलडोजर’ एक्शन
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में अवैध रूप से चल रहे मदरसों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है:
  • अब तक राज्य में लगभग 136 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है।
  • करीब 400 अन्य मदरसों की जांच जारी है, जो बिना पंजीकरण या अवैध भूमि पर संचालित पाए गए हैं।
  • सीएम ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए किसी भी ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी रंग की चादर से ढका हो।
विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया
इस फैसले का मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने विरोध किया है। उत्तराखंड मुस्लिम सेवा संगठन ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया है, जबकि विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है।

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