गैरसैंण (भराड़ीसैंण): उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 के दौरान एक बार फिर कृषि मंत्री गणेश जोशी प्राकृतिक खेती से जुड़े आंकड़ों और सवालों पर असहज नजर आए। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने इस विषय पर जानकारी मांगी, तो मंत्री संतोषजनक उत्तर देने में संघर्ष करते दिखे।

11 जिलों में प्राकृतिक खेती की शुरुआत
काफी जद्दोजहद के बाद कृषि मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ लागू किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि:
  • कार्यक्षेत्र: टिहरी और रुद्रप्रयाग को छोड़कर राज्य के शेष 11 जिलों (पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर) में यह मिशन चल रहा है।
  • क्षेत्रफल: वर्तमान में 10,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है।
  • समय सीमा: इसी रबी सत्र से इन क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती शुरू की गई है।
उत्पादन पर संशय और विपक्ष के सवाल
सदन में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने 10,000 हेक्टेयर में हुई कुल पैदावार का सटीक आंकड़ा मांगा।
  • मंत्री जोशी ने जवाब दिया कि रबी की फसल अभी बोई गई है और इसकी कटाई अप्रैल में होनी है, इसलिए उत्पादन की स्पष्ट तस्वीर फसल कटने के बाद ही साफ हो पाएगी।
  • इस जवाब पर विपक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि मंत्री बिना तैयारी के सदन में आए हैं।
मार्केटिंग के लिए ‘थ्री-के’ आउटलेट
मंत्री ने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) के लिए विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में 337 ‘थ्री-के’ (Three K) आउटलेट स्थापित किए हैं।
पिछला विवाद और प्रश्न का इतिहास
बता दें कि यह सवाल पिछले सत्र में डोईवाला विधायक

बृजभूषण गैरोला द्वारा लगाया गया था, जिसे उस समय विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने मंत्री के स्पष्ट जवाब न दे पाने के कारण स्थगित कर दिया था। पिछले सत्र में मंत्री जोशी ‘प्राकृतिक’ और ‘जैविक’ खेती के बीच के अंतर को समझाने में भी उलझ गए थे।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा और हंसी-मजाक का माहौल बना रहा, जिसके बाद अंततः मंत्री ने वर्तमान सत्र की स्थिति स्पष्ट की।

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