उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ प्रसिद्ध टिहरी झील में पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए फ्लोटिंग हट्स के संचालन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया है। यह निर्णय शनिवार, 2 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान के बाद लिया गया है, जिसमें झील के बीचों-बीच स्थित इन हट्स को भारी नुकसान पहुँचा था।
टिहरी बांध की झील में डोबरा-चांठी पुल के समीप संचालित लग्जरी फ्लोटिंग हट्स के संचालन को अग्रिम आदेशों तक बंद कर दिया गया है। शनिवार शाम को आए तेज अंधड़ और ऊंची लहरों के कारण इन हट्स के एक्सल-ज्वाइंट (Axle Joints) टूट गए, जिससे हट्स दो हिस्सों में बंट गए और झील में तिरछे होकर बहने लगे।
इस घटना के दौरान हट्स में लगभग 30 पर्यटक मौजूद थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हट्स के क्षतिग्रस्त होने और पानी के बीच फंसने से पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही SDRF (State Disaster Response Force) की टीम ने रात के अंधेरे और खराब मौसम के बीच चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जिलाधिकारी वरुणा अग्रवाल ने रविवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया। सुरक्षा मानकों में चूक और तकनीकी खामियों के चलते प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- तत्काल प्रतिबंध: फ्लोटिंग हट्स के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब पूर्ण सुरक्षा मानकों के अनुपालन के बाद ही इन्हें दोबारा शुरू किया जा सकेगा।
- उच्चस्तरीय जांच समिति: एसडीएम टिहरी कमलेश मेहता की अध्यक्षता में एक 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इस समिति में लोक निर्माण विभाग (PWD), पुलिस, पर्यटन विभाग और SDRF के अधिकारी शामिल हैं।
- सेफ्टी ऑडिट: यह समिति अगले चार दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपेगी और फ्लोटिंग हट्स का सेफ्टी ऑडिट (Safety Audit) करेगी। ऑडिट रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।
विवादों में रहा है संचालन
यह पहली बार नहीं है जब इन फ्लोटिंग हट्स पर सवाल उठे हैं। पीपीपी (PPP) मोड पर गुजरात की ली राय (Le Roi) कंपनी द्वारा संचालित इन हट्स पर पूर्व में भी झील में सीवर का गंदा पानी डालने और प्रदूषण फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, जिसके कारण अक्टूबर 2022 में इनका किचन सील किया गया था। वर्तमान में भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय में प्रदूषण और लाइसेंस संबंधी मामलों को लेकर जनहित याचिकाएं लंबित हैं।
स्थानीय निवासियों और उत्तरायणी समिति ने भी नियमों की अनदेखी और नियमित मरम्मत न होने का आरोप लगाया है। फिलहाल, जिला प्रशासन का कहना है कि जन सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।