उत्तराखंड के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल इन दिनों प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े तेवर अपनाए हुए हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के प्रोफेशनल व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर सख्त हिदायत जारी की है। मंत्री उनियाल ने साफ कर दिया है कि डॉक्टरों की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी

उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल लगातार अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों के ‘प्रोफेशनलिज्म’ को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
  1. बाहरी दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध: मंत्री ने पाया कि कई सरकारी डॉक्टर मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे डॉक्टरों का वे खुद “इलाज” करेंगे और उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
  2. रेफरल संस्कृति का अंत: मंत्री उनियाल ने डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों को केवल ‘रेफरल सेंटर’ न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और सुविधाएं मौजूद हैं, तो मरीज को बेवजह उच्च संस्थानों में रेफर करना उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है।
  3. मरीजों के साथ शालीन व्यवहार: औचक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने डॉक्टरों को मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ शालीनता और संवेदनशीलता से पेश आने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का व्यवहार मरीज के आधे इलाज के बराबर होता है।
अस्पतालों का आधुनिकीकरण और मॉडल विजन:
  • दून अस्पताल को मॉडल बनाना: मंत्री उनियाल ने दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 6 नई अत्याधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिसमें ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक शामिल हैं। उनका लक्ष्य इसे निजी अस्पतालों से बेहतर विकल्प बनाना है। 
  • निजी डॉक्टरों की सेवा: स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अब सरकारी अस्पतालों में जहां विशेषज्ञ नहीं हैं, वहां निजी डॉक्टरों (Private Doctors) की मदद लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
  • साफ-सफाई और अनुशासन: अस्पतालों के शौचालयों और वार्डों की गंदगी पर मंत्री ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को स्वच्छता बनाए रखने के लिए जवाबदेह ठहराया। 
सुबोध उनियाल के इन कदमों का उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में जनता के विश्वास को फिर से जगाना है।

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