उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात देते हुए प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड (ब्लॉक) में गर्ल्स हॉस्टल बनाने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। यह घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार विधानसभा क्षेत्रों की विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान की गई।

उत्तराखंड सरकार राज्य में महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी 95 विकासखंडों में छात्राओं के लिए आवासीय छात्रावास (गर्ल्स हॉस्टल) स्थापित किए जाएं। 
मुख्यमंत्री ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए हैं:
  • सर्वाधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों का चयन: प्रत्येक ब्लॉक में उन स्कूलों की पहचान की जाएगी जहाँ छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है, ताकि हॉस्टल का लाभ अधिक से अधिक बेटियों को मिल सके।
  • भूमि चयन और बुनियादी ढांचा: जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को जल्द से जल्द उपयुक्त भूमि चिन्हित करने और निर्माण कार्यों की योजना बनाने को कहा गया है।
  • समयबद्ध निगरानी (PERT Chart): मुख्यमंत्री की घोषणाओं को समय पर पूरा करने के लिए एक ‘प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्निक’ (PERT) चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कार्यों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। 
योजना के मुख्य उद्देश्य और लाभ:
  1. सुरक्षित वातावरण: दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को पढ़ाई के दौरान एक सुरक्षित और आरामदायक निवास स्थान उपलब्ध होगा।
  2. शिक्षा के स्तर में सुधार: हॉस्टल की सुविधा मिलने से छात्राओं के ड्रॉप-आउट रेट में कमी आएगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ स्कूल घर से काफी दूर हैं।
  3. मुफ्त सुविधाएं: सरकार पहले से ही कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका छात्रावासों के माध्यम से वंचित और कमजोर वर्ग की बालिकाओं को मुफ्त भोजन, आवास और शिक्षण सामग्री प्रदान कर रही है, और अब इस नेटवर्क का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि स्कूलों और हॉस्टल के आसपास बिजली, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। साथ ही, छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए राजकीय विद्यालयों में सेनेटरी पैड की उपलब्धता हेतु कॉरपस फंड बनाने की भी बात कही गई है। 
धामी सरकार का यह कदम उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनाने और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को धरातल पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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