कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत के बाद, शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
ऐतिहासिक जनादेश और सत्ता परिवर्तन
भाजपा ने राज्य की 294 सीटों में से 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही बंगाल में पिछले 15 वर्षों से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन का अंत हो गया है। शुभेंदु अधिकारी, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का सिपहसालार माना जाता था, अब बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभरे हैं। उन्होंने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर अपनी “जायंट किलर” की छवि को और मजबूत किया है।
भाजपा ने राज्य की 294 सीटों में से 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही बंगाल में पिछले 15 वर्षों से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन का अंत हो गया है। शुभेंदु अधिकारी, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का सिपहसालार माना जाता था, अब बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभरे हैं। उन्होंने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर अपनी “जायंट किलर” की छवि को और मजबूत किया है।
शपथ ग्रहण के मुख्य बिंदु:
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- बंगाली अस्मिता पर जोर: शुभेंदु अधिकारी ने अपनी शपथ ‘बांग्ला’ भाषा में ली, जो भाजपा द्वारा खुद को राज्य की संस्कृति से जोड़ने के प्रयासों का संकेत है।
- डबल इंजन की सरकार: अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने “सोनार बांग्ला” के संकल्प को दोहराया और केंद्र के साथ मिलकर राज्य के विकास की बात कही।
- कैबिनेट का विस्तार: शुभेंदु के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और निशिथ प्रामाणिक जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।
- टैगोर को नमन: शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री सीधे जोरासांको ठाकुरबाड़ी (रवींद्रनाथ टैगोर का जन्मस्थान) पहुंचे और गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की।
चुनौतियां और भविष्य की राह
शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा पर लगाम लगाना है। उन्होंने कार्यभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने का वादा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु का मुख्यमंत्री बनना न केवल बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी भाजपा के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।
शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा पर लगाम लगाना है। उन्होंने कार्यभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने का वादा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु का मुख्यमंत्री बनना न केवल बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी भाजपा के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।
यह जीत बंगाल में दशकों से चली आ रही क्षेत्रीय दलों की राजनीति के मुकाबले एक राष्ट्रीय पार्टी के पूर्ण वर्चस्व की शुरुआत मानी जा रही है। समर्थकों में भारी उत्साह है और पूरे कोलकाता में उत्सव का माहौल देखा जा रहा है।