नई दिल्ली: भारत की राजधानी के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडलम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। भारत की अध्यक्षता में शुरू हुई इस दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक स्थिरता कभी भी चुनिंदा नहीं हो सकती और न ही दुनिया में शांति को टुकड़ों-टुकड़ों में (Piecemeal) स्थापित किया जा सकता है।
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष, लाल सागर के सुरक्षा संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नियमों के पालन की नसीहत दी है। इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने बिना नाम लिए अमेरिका की ‘दबाव और प्रतिबंधों’ वाली नीति पर भी तीखा परोक्ष प्रहार किया।
🌐 “ना स्थिरता चुनिंदा हो सकती है, ना शांति टुकड़ों में”: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकटों का उल्लेख करते हुए कुछ बेहद महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे:
- शांति का समग्र दृष्टिकोण: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दुनिया के एक हिस्से में युद्ध और दूसरे हिस्से में शांति की उम्मीद करना बेमानी है। शांति और स्थिरता के लिए वैश्विक स्तर पर एक समान प्रयास होने चाहिए।
- सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: उन्होंने दो टूक कहा कि युद्ध या संघर्ष की स्थिति में भी अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना, आम नागरिकों की रक्षा करना और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे कि अस्पतालों, स्कूलों, बिजली और पानी के प्लांटों को निशाना बनाने से बचना हर हाल में अनिवार्य होना चाहिए।
- समुद्री व्यापार मार्गों पर संकट: उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्गों में निर्बाध और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया, क्योंकि इन मार्गों पर हो रहे हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ गई है।
⚡ अमेरिका के ‘एकतरफा प्रतिबंधों’ पर तीखा प्रहार
ब्रिक्स के मंच से भारत ने विकासशील देशों (Global South) की आवाज को मजबूती देते हुए अमेरिका की विदेश नीति पर भी निशाना साधा। विदेश मंत्री ने कहा कि:
- यूएन चार्टर का उल्लंघन: संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर दूसरे देशों पर लगाए जाने वाले एकतरफा दंडात्मक प्रतिबंध (Unilateral Sanctions) पूरी तरह अनुचित हैं।
- विकासशील देशों को नुकसान: इस प्रकार के एकतरफा प्रतिबंधों का सबसे बुरा असर रूस या ईरान जैसे लक्षित देशों के बजाय दुनिया के विकासशील और गरीब देशों की प्रगति पर पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।
- कूटनीति का कोई विकल्प नहीं: जयशंकर ने आर्थिक या सैन्य दबाव की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि एकतरफा दबाव कभी भी आपसी संवाद और कूटनीति (Diplomacy) का विकल्प नहीं बन सकते। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता ही अपनाया जाना चाहिए।
🏛️ ब्रिक्स (BRICS) संगठन का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका
भारत ने इस साल 1 जनवरी से ब्रिक्स संगठन की आधिकारिक अध्यक्षता संभाली है, जिसके तहत दिल्ली के भारत मंडपम में इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं:
- 11 देशों का मजबूत समूह: वर्ष 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद ब्रिक्स समूह में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हो चुके हैं।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी: यह संगठन अब दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी (GDP) और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
- प्रधानमंत्री से मुलाकात: बैठक के पहले दिन ब्रिक्स देशों के सभी आगंतुक विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिष्टाचार मुलाकात की और वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।