बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी तीन दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं, जहां ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल’ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका भव्य स्वागत किया। वर्ष 2017 के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पहला चीन दौरा है। डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बंद कमरे में द्विपक्षीय शिखर वार्ता हुई, जिसे दोनों पक्षों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। इस उच्च स्तरीय बैठक में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते, ताइवान विवाद, ईरान संकट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। 
इस बैठक के दौरान एक ओर जहां अमेरिका को व्यापारिक मोर्चे पर बड़े समझौते हासिल हुए हैं, वहीं दूसरी ओर ताइवान मुद्दे को लेकर शी जिनपिंग ने ट्रंप को सीधे शब्दों में सोच-समझकर आगे बढ़ने की सख्त चेतावनी दी है। 

व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी कामयाबी: तेल और 200 बोइंग जेट की डील
इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने साथ शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर बीजिंग पहुंचे हैं, जिसमें टेस्ला के एलन मस्क, एप्पल के टिम कुक और एनवीडिया के जेनसन हुआंग शामिल हैं। बैठक के बाद पहले दिन निम्नलिखित महत्वपूर्ण व्यापारिक उपलब्धियां सामने आईं: 
  • 200 बोइंग विमानों का ऑर्डर: राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि चीन लगभग एक दशक में पहली बार अमेरिका से 200 बोइंग कमर्शियल जेट विमान खरीदने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने इसे एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक कमिटमेंट बताया है।
  • अमेरिकी तेल खरीदेगा चीन: चीन ने अमेरिकी तेल (US Oil) खरीदने पर भी अपनी सहमति दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, चीनी जहाज अब तेल लेने के लिए अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का जाएंगे।
  • आर्थिक सहयोग को बढ़ावा: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी दोनों महाशक्तियों के बीच इस सकारात्मक बातचीत का स्वागत किया है और कहा है कि इससे वैश्विक बाजार की अनिश्चितता कम होगी। 

ताइवान मुद्दे पर शी जिनपिंग की सख्त चेतावनी
भव्य स्वागत और रेड कार्पेट कूटनीति के बीच चीन ने वाशिंगटन को ताइवान के मुद्दे पर अपने सख्त रुख से अवगत करा दिया है: [1]
  1. टकराव का खतरा: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप से बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यदि ताइवान के मामले को ठीक से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव और संघर्ष (Clashes and Conflicts) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे पूरे द्विपक्षीय संबंध खतरे में पड़ जाएंगे।
  2. आग और पानी का रिश्ता: जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि ताइवान की स्वतंत्रता की मांग और ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में शांति, दोनों आग और पानी की तरह एक-दूसरे के विपरीत हैं।
  3. अमेरिका का रुख: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस चेतावनी के बाद स्पष्ट किया कि ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन चीन द्वारा बल प्रयोग करना एक ‘भयानक भूल’ साबित होगी। 
 ईरान संकट और AI सेफ्टी पर अहम रणनीतिक चर्चा 
व्यापार के अलावा दोनों देशों के नेताओं ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों पर भी विस्तार से बातचीत की:
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना: व्हाइट हाउस और चीनी अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर पूरी तरह सहमत हुए कि वर्तमान युद्ध और तनाव के माहौल के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों के आवागमन के लिए खुला रहना चाहिए
  • ईरान पर दबाव: अमेरिकी अधिकारियों ने चीन से अपील की कि वह ईरान संकट को सुलझाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाए और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान को फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ाने से रोके।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर समझौता: अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी कि दोनों देश एआई सुरक्षा (AI Safety) और इसके लिए प्रोटोकॉल निर्धारित करने पर चर्चा शुरू करने जा रहे हैं, ताकि शक्तिशाली एआई मॉडल्स किसी भी गैर-राज्य तत्वों (Non-state actors) या आतंकियों के हाथ न लग सकें।

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