देहरादून, 20 मई 2026:
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के नेहरू कॉलोनी (रिसपना पुल के पास) स्थित प्रसिद्ध पैनेसिया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (Panacea Hospital) में बुधवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया। अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) वार्ड में लगे एक स्प्लिट एयर कंडीशनर (AC) में अचानक भयंकर शॉर्ट सर्किट होने के कारण ज़ोरदार ब्लास्ट हो गया। इस धमाके के साथ ही पूरे आईसीयू और अस्पताल परिसर में भीषण आग लग गई। हादसे के वक्त अस्पताल में कुल 14 मरीज भर्ती थे, जिनमें से कई आईसीयू के अंदर ही वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। एसी ब्लास्ट के तुरंत बाद अस्पताल की फॉल्स सीलिंग से शुरू हुई आग ने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया और पूरे परिसर में दमघोंटू जहरीला धुआं फैल गया। 
वेंटिलेटर पर भर्ती महिला मरीज की दम घुटने से मौत
इस दर्दनाक हादसे के दौरान आईसीयू में वेंटिलेटर पर गंभीर अवस्था में भर्ती 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला मरीज, वीरवती (निवासी बल्लीवाला/देहरादून ग्रामीण), की जहरीले धुएं के कारण दम घुटने (Asphyxiation) से मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के बाद चंद मिनटों में ही वार्डों के भीतर इतना घना धुआं भर गया था कि मरीजों का सांस लेना पूरी तरह दूभर हो गया। मृतका पहले से ही गंभीर हालत में ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी, और बिजली आपूर्ति बाधित होने तथा दमघोंटू गैस के फैलने से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके अलावा, हादसे में एक नवजात बच्ची पायल, दो वर्षीय मासूम गोरी समेत करीब 13 अन्य मरीज और राहत कार्य में जुटे 3 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए और धुएं के कारण बीमार पड़ गए।
दून पुलिस और फायर ब्रिगेड का हैरतअंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही देहरादून पुलिस प्रशासन, फायर सर्विस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें सक्रिय हुईं और महज 6 मिनट के भीतर रिस्पॉन्स टाइम दिखाते हुए घटनास्थल पर पहुंच गईं। अस्पताल के भीतर का नजारा खौफनाक था; चारों तरफ चीख-पुकार मची थी और तीमारदार अपने मरीजों को लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे। आग की लपटों और जहरीली गैस के गुबार के बीच दून पुलिस के जांबाज जवानों और अग्निशमन कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। फायर ब्रिगेड के जवानों ने तुरंत आईसीयू के शीशों को कटर और हथौड़ों से तोड़ा ताकि अंदर भरा हुआ जहरीला धुआं बाहर निकल सके और ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारू हो सके।
पुलिसकर्मियों ने स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और गोद में उठाकर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। दून पुलिस के तीन जवान आग बुझाने और मरीजों को वार्डों से खींचकर बाहर निकालने के प्रयास में खुद भी बुरी तरह झुलस गए और धुएं के कारण बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। फायर सर्विस की कई गाड़ियों ने 3 डिलीवरी हौज पाइपों को फैलाकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। 
घायलों को कैलाश अस्पताल में कराया गया शिफ्ट
हादसे के तुरंत बाद देहरादून के जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र डोभाल और जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल के नेतृत्व में एम्बुलेंसों की कतार लगाकर सभी 14 प्रभावित मरीजों को तुरंत पास के कैलाश अस्पताल (Kailash Hospital, जोगीवाला) और कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्ट कराया गया। कैलाश अस्पताल के निदेशक पवन शर्मा ने मीडिया को बताया कि उनके यहां लाए गए मरीजों में से दो की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरी पैनेसिया अस्पताल की बिल्डिंग को खाली कराकर सील कर दिया है और आसपास के पूरे इलाके को सुरक्षित घेरे में ले लिया है। 
उच्च स्तरीय मजिस्ट्रियल जांच के आदेश; इमरजेंसी सेवाएं सीज
इस बड़े हादसे की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे और आईजी (IG) गढ़वाल तुरंत घटनास्थल और कैलाश अस्पताल पहुंचे। गढ़वाल कमिश्नर ने पूरे मामले की विस्तृत मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह अस्पताल पैनेसिया ग्रुप द्वारा लीज पर संचालित किया जा रहा था। 
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच टीम अस्पताल के फायर सेफ्टी ऑडिट, एनओसी (NOC), वेंटिलेशन सिस्टम, और बिजली के लोड मैनेजमेंट की बारीकी से जांच करेगी। अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि अस्पताल प्रबंधन की ओर से फायर सेफ्टी मानकों या उपकरणों के रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने देश और राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस और समय-समय पर होने वाले सेफ्टी ऑडिट के क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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