19 मई 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। हरिद्वार की श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट में शिकारियों ने दो युवा बाघों (Tigers) को जहर देकर मार डाला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्करी के उद्देश्य से उनके पैर (पंजे) काटकर अपने साथ ले गए। वन विभाग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी वन गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं।

घटना का पूरा विवरण (Case Summary)

मुख्य विवरण  जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
घटनास्थल सजनपुर बीट, श्यामपुर कंपार्टमेंट संख्या-09, हरिद्वार वन प्रभाग
मृत वन्यजीव 2 बाघ (उम्र लगभग दो वर्ष, भाई-बहन)
क्रूरता का प्रकार भैंस के मांस में जहर मिलाकर मारना और चारों पंजे काटना
कार्रवाई मुख्य आरोपी आलम उर्फ फम्मी गिरफ्तार, तीन नामजद फरार


सर्च ऑपरेशन में खुला खौफनाक राज
  • वन विभाग को सोमवार (18 मई) को मुखबिर से श्यामपुर रेंज में कुछ वन गुर्जरों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी।
  • प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) स्वप्निल अनिरुद्ध के निर्देशन में एक विशेष सर्च टीम का गठन कर जंगल में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया गया।
  • सोमवार शाम करीब 6:30 बजे टीम को पहले एक दो वर्षीय नर बाघ का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ, जिसके चारों पैर (पंजे) गायब थे।
  • इसके बाद मंगलवार (19 मई) को पूरे दिन चले सघन कांबिंग अभियान के दौरान घटनास्थल से महज 150 मीटर दूर एक और मादा बाघ का शव मिला।
  • दूसरी बाघिन के भी चारों पंजे बेरहमी से कटे हुए थे, जिससे पूरे वन महकमे और वन्यजीव प्रेमियों में हड़कंप मच गया। 
प्रतिशोध और तस्करी: कैसे दिया घटना को अंजाम
  • जांच में घटनास्थल के पास एक मृत भैंस और उसके बच्चे (पड़िया) का शव भी बरामद किया गया है।
  • शुरुआती जांच के अनुसार, कुछ दिन पहले इन बाघों ने वन गुर्जरों के मवेशियों (भैंस) का शिकार किया था।
  • इसका बदला लेने और वन्यजीव अंगों की तस्करी के लालच में आरोपियों ने मवेशी के शव में भारी मात्रा में घातक जहर (विषाक्त पदार्थ) मिला दिया।
  • 17 मई को इस जहरीले मांस को खाने के बाद दोनों युवा बाघों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
  • बाघों के मरने के बाद शिकारी धारदार हथियार से उनके चारों पैर काटकर ले गए, जबकि उनकी खाल और दांत बरामद कर लिए गए हैं। 
एक शिकारी दबोचा, तीन अन्य की तलाश जारी
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने सोमवार रात को ही मुख्य आरोपी आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार कर लिया।
  • पकड़े गए आरोपी को मंगलवार को हरिद्वार न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सीधे जेल भेज दिया गया है।
  • इस जघन्य अपराध में शामिल तीन अन्य आरोपी—आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी—फिलहाल फरार हैं।
  • वन विभाग और पुलिस की विशेष टीमें फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।  
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की निगरानी 
  • दोनों मृत बाघों के शवों को कब्जे में लेकर NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के सख्त प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम कराया गया है।
  • फॉरेंसिक जांच के लिए विधिक विसरा सैंपलिंग की गई है ताकि जहर के प्रकार का सटीक पता लगाया जा सके।
  • हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर, चिड़ियापुर और रसियाबड़ रेंज में हजारों वन गुर्जर अवैध रूप से डेरा डाले हुए हैं।
  • वन अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते सर्च ऑपरेशन न चलाया जाता, तो अंतरराष्ट्रीय तस्कर बाघों की खाल और दांत भी गायब कर देते।

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