पिथौरागढ़, 3 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में गुलदार के हमले में 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घटना शनिवार शाम की बताई जा रही है। गंगोलीहाट तहसील मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर भंडारीगांव-खेतीगांव क्षेत्र में बच्चा घर के आंगन के पास खेल रहा था, तभी गुलदार उसे उठाकर ले गया।

घर के पास खेल रहा था बच्चा

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 10 वर्षीय रियांशु, पुत्र भगवान राम, शनिवार शाम करीब पांच बजे घर के आसपास खेल रहा था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने उस पर हमला किया और उसे उठाकर ले गया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए गुलदार का पीछा किया और आसपास के जंगल एवं झाड़ियों में बच्चे की तलाश शुरू की।

काफी तलाश के बाद बच्चे का शव घर से करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों में बरामद हुआ। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, शव मुख्य सड़क से भी लगभग 250 मीटर दूर मिला। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में दहशत फैल गई और परिवार में कोहराम मच गया।

वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। वन दरोगा देवेंद्र सिंह महरा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तय की गई।  

ग्रामीण पहले भी कर चुके थे शिकायत

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही बनी हुई थी। ग्राम प्रधान दान सिंह मेहता के अनुसार, 25 सितंबर को आयोजित जनता दरबार में जिलाधिकारी को पत्र देकर क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता की जानकारी दी गई थी और उसे पकड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी।

बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में गुलदार की निगरानी बढ़ाने, उसे पकड़ने और लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठी है।

गंगोलीहाट में पहले भी हो चुके हैं गुलदार के हमले

गंगोलीहाट क्षेत्र में गुलदार के हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अक्टूबर 2023 में गंगोलीहाट के कोठेरा गांव में दो साल से अधिक उम्र के बच्चे की तेंदुए के हमले में मौत हुई थी। उस मामले में वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की बात कही थी।

इस ताजा घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

 

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