देहरादून/नैनीताल, 4 अक्टूबर 2026: गांधी जयंती के लंबे वीकेंड के चलते उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों मसूरी और नैनीताल में शनिवार को पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बड़ी संख्या में निजी वाहनों के पहाड़ों की ओर पहुंचने से कई प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई और पर्यटकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, आजतक और नवभारत टाइम्स सहित कई समाचार स्रोतों ने इस ट्रैफिक संकट की रिपोर्ट की है।
मसूरी में शुक्रवार से ही वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू हो गया था। शनिवार को भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और शहर के कई हिस्सों में वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। लाइब्रेरी चौक, लाइब्रेरी-किंक्रेग मार्ग, लाइब्रेरी बाजार, मोतीलाल नेहरू मार्ग, सिविल अस्पताल रोड और मसूरी-धनोल्टी रोड पर यातायात प्रभावित रहा।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी-देहरादून मार्ग पर किंक्रेग से कोल्हूखेत और शिवमंदिर कुठालगेट तक वाहनों की कतार दिखाई दी। मसूरी आने और वापस लौटने वाले पर्यटक काफी देर तक जाम में फंसे रहे। गांधी चौक के आसपास भी यातायात का दबाव इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट करना पड़ा।
मसूरी में यातायात की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जाम के कारण स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी विधायक एवं मंत्री गणेश जोशी को भी कार्यक्रम में पहुंचने के लिए अपना सरकारी वाहन छोड़कर स्कूटी का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान शहर के बाजार और पर्यटन स्थल पर्यटकों से खचाखच भरे रहे।
पर्यटकों की भारी आमद का असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी दिखाई दिया। मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, शुक्रवार शाम तक होटलों में करीब 90 प्रतिशत ऑक्युपेंसी हो चुकी थी, जबकि कई स्टार होटल पूरी तरह भर चुके थे। शनिवार को भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से कमरों की उपलब्धता को लेकर परेशानी की स्थिति बनी रही।
मसूरी में पार्किंग की सीमित व्यवस्था भी जाम का एक बड़ा कारण बनकर सामने आई। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हाथीपांव डायवर्जन जैसे उपाय किए गए, लेकिन इससे भी यातायात दबाव में अपेक्षित कमी नहीं आई। पार्किंग की कमी के कारण सड़क पर वाहनों का दबाव लगातार बना रहा।
उधर, नैनीताल में भी हालात बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी जयंती की छुट्टियों और लंबे वीकेंड के दौरान करीब 12 हजार पर्यटकों के पहुंचने से नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव अचानक बढ़ गया। सुबह करीब सात बजे से ही कई मार्गों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी और देखते ही देखते लंबी कतारें लग गईं।
नैनीताल के आसपास भवाली से कैंची धाम, गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाले मार्गों पर भी वाहनों का भारी दबाव देखने को मिला। कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण कई जगह वाहन बेहद धीमी गति से आगे बढ़े। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने भी इस मार्ग पर यातायात का दबाव और बढ़ा दिया।
जाम का असर नैनीताल शहर के अंदर भी दिखाई दिया। मालरोड, हल्द्वानी रोड, भवाली रोड, कालाढूंगी रोड और शेरवानी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। कई पर्यटक परिवारों को अपने निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा और यात्रा का काफी समय सड़कों पर जाम में गुजर गया।
दैनिक जागरण की रविवार सुबह प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को नैनीताल में स्थिति और गंभीर रही। रूसी बाईपास से भूमियाधार और नारायणनगर तक वाहनों का दबाव बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि शुक्रवार रात कई पर्यटकों को होटल में कमरा नहीं मिलने के कारण सड़क किनारे रात बितानी पड़ी।
कैंची धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। दैनिक जागरण के अनुसार, शनिवार को यहां करीब 60 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान सामने आया। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बड़ी संख्या के कारण हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर भी यातायात बाधित हुआ और कई लोग घंटों वाहनों में फंसे रहे।
नैनीताल में होटल और होमस्टे भी लगभग पूरी तरह भर गए। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में करीब 700 होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट हैं और अधिकांश में कमरे उपलब्ध नहीं थे। होटल नहीं मिलने के कारण कुछ पर्यटकों को बस स्टेशन, रिक्शा स्टैंड और सड़क किनारे रात बितानी पड़ी।
लंबे वीकेंड की भीड़ को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने पहले ही 2 से 4 अक्टूबर तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई थी।
इसके बावजूद पर्यटकों की संख्या इतनी अधिक रही कि कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया। पहाड़ी शहरों में सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और पार्किंग की क्षमता सीमित है। ऐसे में एक साथ हजारों निजी वाहनों के पहुंचने से सामान्य यातायात को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी 3 अक्टूबर की रिपोर्ट में उत्तराखंड के पर्यटन और धार्मिक स्थलों की ओर भारी भीड़ के कारण यातायात प्रभावित होने की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे वीकेंड में लोग बड़ी संख्या में पहाड़ी इलाकों की ओर रवाना हुए, जिससे मसूरी और नैनीताल सहित कई प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव बढ़ा।
ट्रैफिक जाम का असर सिर्फ पर्यटकों पर ही नहीं पड़ा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। रोजमर्रा के काम, अस्पताल और बाजार जाने वाले लोगों को भी सामान्य से अधिक समय लगा। कई जगह आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी भीड़ के बीच रास्ता बनाने में कठिनाई हुई।
इस स्थिति ने उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में पर्यटन और यातायात प्रबंधन के बीच बेहतर संतुलन की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। पर्यटकों की संख्या बढ़ना स्थानीय होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटन व्यवसायों के लिए सकारात्मक है, लेकिन सीमित सड़क और पार्किंग क्षमता के कारण अचानक बढ़ने वाली भीड़ गंभीर समस्या पैदा कर रही है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसे लंबे वीकेंड पर शहरों में प्रवेश करने वाले वाहनों को नियंत्रित करना, पार्किंग स्थलों की क्षमता बढ़ाना, शटल सेवाओं को मजबूत करना और पर्यटकों को पहले से यातायात संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है। कैंची धाम, भवाली और नैनीताल के बीच यातायात को अलग-अलग हिस्सों में नियंत्रित करने से भी दबाव कम किया जा सकता है।
फिलहाल गांधी जयंती के लंबे वीकेंड के कारण उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ बनी हुई है। मसूरी और नैनीताल में शनिवार को लगे जाम ने यह स्पष्ट कर दिया कि छुट्टियों के दौरान पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर वाहनों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए दीर्घकालिक ट्रैफिक और पार्किंग योजना की आवश्यकता है।