उत्तराखंड समाचार | 24 अक्टूबर 2026
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों के आचरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। करीब 24 साल बाद वर्ष 2002 में लागू कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन करते हुए राज्य सरकार ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की है। नए प्रावधानों के तहत सरकारी कर्मचारी की पत्नी या आश्रित रिश्तेदार उसके तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, संपत्ति खरीदने-बेचने और संपत्ति का विवरण देने से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं।
24 साल बाद कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में लागू कर्मचारी आचरण नियमावली में अब महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, संशोधित नियमावली में सरकारी कर्मचारियों की पारिवारिक गतिविधियों, संपत्ति के लेन-देन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े प्रावधानों को नए सिरे से निर्धारित किया गया है।
इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के आचरण को निर्धारित नियमों के दायरे में रखना और संपत्ति से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सरकारी कर्मचारी के आश्रितों के लिए क्या है नया नियम?
संशोधित नियमावली के नियम-15 के तहत सरकारी कर्मचारी अपनी पत्नी या ऐसे अन्य रिश्तेदार को, जो उस पर पूरी तरह आश्रित है या उसके साथ रहता है, उस जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दे सकता, जहां कर्मचारी की तैनाती है।
इस प्रावधान का सीधा अर्थ है कि संबंधित कर्मचारी के तैनाती वाले जिले में उसके परिवार के पात्र आश्रित सदस्य बीमा एजेंसी का काम नहीं कर सकेंगे। यह प्रतिबंध कर्मचारी की तैनाती से जुड़े जिले पर केंद्रित है; इसे पूरे देश में बीमा एजेंट बनने पर प्रतिबंध के रूप में नहीं समझना चाहिए।
चल संपत्ति खरीदने के नियमों में भी बदलाव
नई नियमावली में सरकारी कर्मचारियों की चल संपत्ति, जैसे मोबाइल फोन, टेलीविजन और अन्य महंगे सामान की खरीद से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
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यदि कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे एक माह के भीतर अपने नियुक्ति प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।
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यदि संपत्ति ऐसे व्यक्ति से खरीदी जाती है जिसका सरकार के साथ व्यावसायिक लेन-देन है, तो संबंधित नियमों के अनुसार पहले अनुमति लेना आवश्यक होगा।
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पहले इस मामले में एक माह के वेतन या 5,000 रुपये, जो भी कम हो, की सीमा का प्रावधान था। अब इसे दो माह के मूल वेतन से जोड़ा गया है।
जमीन और मकान खरीदने-बेचने पर क्या बदला?
सरकार ने अचल संपत्ति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए हैं। अब कर्मचारी को अपने या परिवार के नाम पर जमीन, मकान अथवा अन्य अचल संपत्ति खरीदने, बेचने, पट्टे पर लेने या उपहार के रूप में प्राप्त करने जैसे लेन-देन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सामान्य परिस्थितियों में संबंधित संपत्ति के लेन-देन की सूचना नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी। वहीं, यदि लेन-देन ऐसे व्यक्ति, फर्म या संस्था के साथ होता है जिसका सरकार से व्यावसायिक संबंध है, तो लागू प्रावधानों के अनुसार पूर्व अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
इस बदलाव के तहत कर्मचारियों को संपत्ति से जुड़े किसी भी बड़े लेन-देन से पहले संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों की जांच करनी होगी।
अब कितने अंतराल पर देना होगा संपत्ति का विवरण?
सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने की समयसीमा भी निर्धारित की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार:
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समूह क, ख और ग: प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक वर्ष संपत्ति का विवरण देना होगा।
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समूह घ: प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्ति का विवरण देना होगा।
इस व्यवस्था से सरकार को कर्मचारियों की संपत्ति से संबंधित जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
सरकारी कर्मचारियों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
नई नियमावली लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों को बीमा एजेंसी से जुड़े पारिवारिक प्रतिबंधों के साथ-साथ संपत्ति की खरीद-बिक्री, निर्धारित समय में सूचना देने और संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
किसी भी लेन-देन से पहले यह समझना जरूरी होगा कि संबंधित मामले में केवल सूचना देना पर्याप्त है या सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
निष्कर्ष: उत्तराखंड सरकार ने 24 साल बाद कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन कर बीमा एजेंसी, चल-अचल संपत्ति और संपत्ति विवरण से जुड़े प्रावधानों को अपडेट किया है। इन बदलावों का पालन राज्य कर्मचारियों को संशोधित नियमावली के अनुसार करना होगा।