इस चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव भी हो रहे हैं। चुनाव का असर केवल अमेरिकी संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दो वर्षों में ट्रंप की नीतियों, सरकार के फैसलों और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
क्या होते हैं अमेरिका के मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है, जबकि मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच यानी लगभग दो साल बाद आयोजित किए जाते हैं।
इन चुनावों में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस के सदस्यों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है।
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं:
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हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स: इसकी सभी 435 सीटों पर चुनाव होता है।
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सीनेट: कुल 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है।
इन दोनों सदनों में जिस पार्टी का बहुमत होता है, उसे कानून बनाने, सरकारी बजट और प्रशासनिक फैसलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखने का अवसर मिलता है।
इसलिए 2026 के मिडटर्म चुनाव को ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने बहुमत बचाने की चुनौती
फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत है। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप की पार्टी के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती है।
दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस में बहुमत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम तीन सीटों का शुद्ध फायदा और सीनेट में बहुमत के लिए चार सीटों का शुद्ध फायदा हासिल करना होगा।
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में चुनाव से पहले सीटों की स्थिति और रिक्तियों की गणना के आधार पर आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है।
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट बनी बड़ी चिंता
मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) और NORC के सर्वे के अनुसार, लगभग 35 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में कामकाज से संतुष्ट हैं, जबकि 64 प्रतिशत लोगों ने उनके प्रदर्शन पर असंतोष जताया है।
मतदाताओं के बीच महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, ईंधन की लागत और ईरान के साथ जारी युद्ध प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी इन मुद्दों को लेकर ट्रंप प्रशासन को घेर रही है और आरोप लगा रही है कि सरकार आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों को दूर करने में नाकाम रही है।
ईरान युद्ध और महंगाई का चुनाव पर असर
इस बार के चुनाव में ईरान के साथ जारी युद्ध भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। युद्ध के कारण ऊर्जा और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर अमेरिकी मतदाताओं में चिंता है।
डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि ट्रंप की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का आर्थिक बोझ आम अमेरिकी परिवारों पर पड़ रहा है।
वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने अपने चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, आव्रजन नियंत्रण और अमेरिका की वैश्विक स्थिति को प्रमुखता दी है।
इस तरह चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच केवल राजनीतिक बहुमत की लड़ाई नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को लेकर भी मुकाबला देखने को मिल रहा है।
चुनाव से पहले 57 मिलियन से अधिक लोग कर चुके हैं मतदान
इस बार अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में शुरुआती मतदान (Early Voting) को लेकर भी काफी उत्साह देखने को मिला है।
रॉयटर्स और अन्य अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मतदान दिवस से पहले 57 मिलियन से अधिक अमेरिकी नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। वहीं CBS News ने यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा वोटिंग लैब के आंकड़ों के आधार पर यह संख्या 59 मिलियन से अधिक बताई।
इस बार चुनाव पर खर्च भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। गैर-दलीय संगठन OpenSecrets के अनुसार, उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों का कुल चुनावी खर्च लगभग 11.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
किन राज्यों पर रहेंगी पूरी दुनिया की नजरें?
इस चुनाव में कुछ राज्यों की सीनेट सीटें बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इनमें टेक्सास, अलास्का, मिशिगन, ओहायो, आयोवा, कंसास, नॉर्थ कैरोलिना और मेन जैसे राज्य शामिल हैं।
इन राज्यों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है।
विशेष रूप से मिशिगन की सीनेट सीट चर्चा में है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सayed और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के बीच मुकाबला है। डेमोक्रेटिक नेता हेली स्टीवंस द्वारा रिपब्लिकन उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से चुनावी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।
अगर डेमोक्रेट्स जीते तो ट्रंप के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें
मिडटर्म चुनाव में यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में विपक्षी पार्टी सरकारी नीतियों की जांच के लिए संसदीय समितियों का इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा नए कानूनों को पारित कराने, बजट और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी ट्रंप सरकार को विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने पर राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण नियुक्तियों को मंजूरी देने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वहीं यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बरकरार रखती है, तो ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत आसानी होगी।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव की भी तैयार होगी जमीन
2026 के मिडटर्म चुनाव को 2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
यदि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान होता है, तो पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठ सकते हैं। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से उसके नेताओं का मनोबल बढ़ सकता है।
इसके अलावा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य संभावित रिपब्लिकन नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर भी चुनावी नतीजों का असर पड़ सकता है।
फिलहाल चुनावी नतीजों का इंतजार
अमेरिका में 3 नवंबर को मतदान जारी है और विभिन्न राज्यों में मतदान केंद्रों पर मतदाता पहुंच रहे हैं। शुरुआती नतीजे मतदान केंद्रों के बंद होने के बाद आने की उम्मीद है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी मतदाता ट्रंप की नीतियों पर अपना भरोसा जताते हैं या डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस में मजबूत भूमिका निभाने का मौका देते हैं।