देहरादून। उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक देश के अग्रणी और विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का रोडमैप तैयार किया है। इस विजन डॉक्यूमेंट में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, उद्योग, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना और प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये करना है। इस योजना के माध्यम से पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों का संतुलित विकास करने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है।

यह विजन डॉक्यूमेंट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 नवंबर 2026 को देहरादून में जारी किया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने देवभूमि परिवार पोर्टल का भी शुभारंभ किया।

 

छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा विकास का रोडमैप

विकसित उत्तराखंड विजन-2047 में प्रदेश के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए छह प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें आर्थिक विकास, रोजगार, मानव संसाधन, सामाजिक कल्याण, आधारभूत ढांचा, पर्यावरण संरक्षण और तकनीक आधारित सुशासन जैसे विषय शामिल हैं।

सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विकास की ऐसी रणनीति तैयार की जाए, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ें और स्थानीय लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार मिल सके।

विजन डॉक्यूमेंट में वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इससे विकास योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा और उनकी प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

बेरोजगारी और गरीबी कम करने का लक्ष्य

उत्तराखंड सरकार ने रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को इस रोडमैप का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्रदेश में बेरोजगारी दर को मौजूदा 5.7 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

वहीं, बहुआयामी गरीबी को घटाकर 0.61 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इसके अलावा कृषि, पर्यटन, उद्योग, स्वरोजगार और कौशल विकास के माध्यम से करीब 12 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कृषि और बागवानी को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने की योजना तैयार की है।

रोडमैप के तहत:

  • मोटे अनाजों की उत्पादकता 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।

  • लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध (एरोमैटिक) फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • प्राकृतिक खेती, बागवानी और औषधीय पौधों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इससे पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

पर्यटन और धार्मिक यात्रा को मिलेगी नई पहचान

उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत बनाने के लिए भी विजन-2047 में महत्वपूर्ण लक्ष्य रखे गए हैं।

सरकार का लक्ष्य विदेशी पर्यटकों की संख्या को दोगुना करना है। इसके लिए धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, इको टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और होम स्टे को बढ़ावा देने की योजना है।

चारधाम यात्रा के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन पर्यटन को भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

उत्तराखंड जल विद्युत और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। सरकार ने वर्ष 2047 तक प्रदेश की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके साथ ही वन क्षेत्र के संरक्षण और विस्तार पर भी ध्यान दिया जाएगा। विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार प्रदेश में वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का प्रयास है कि विकास कार्यों के साथ हिमालयी पर्यावरण, नदियों, जंगलों और जैव विविधता का भी संरक्षण किया जाए।

 

सड़क, रेल, सुरंग और हवाई कनेक्टिविटी का होगा विस्तार

प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना भी इस विजन का अहम हिस्सा है। इसके लिए सड़क, रेल, सुरंग और हवाई संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

रोडमैप में 13 हेली एंबुलेंस और चार फ्लाइंग स्कूल स्थापित करने का लक्ष्य भी शामिल है।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना जैसी योजनाओं को प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन परिवहन को भी मजबूती मिल सकती है।

 

440 संकेतकों के आधार पर होगी विकास कार्यों की निगरानी

विकसित उत्तराखंड विजन-2047 को केवल एक घोषणापत्र या लक्ष्य निर्धारण तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें लगभग 440 संकेतकों (Indicators) के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के विकास की निगरानी करने की व्यवस्था की गई है।

इसके तहत विभिन्न विभागों को अपने-अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार कार्ययोजनाएं तैयार करनी होंगी। निर्धारित समयसीमा के आधार पर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।

इससे विकास कार्यों में जवाबदेही बढ़ाने और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री धामी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार विकसित उत्तराखंड विजन-2047 प्रदेश के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास करना नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्यमंत्री ने विभागों और अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजनाएं तैयार करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने विकसित भारत-2047 के संकल्प में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता भी जताई।

क्या है विकसित उत्तराखंड विजन-2047 का उद्देश्य?

कुल मिलाकर धामी सरकार का विकसित उत्तराखंड विजन-2047 प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत, रोजगार के लिहाज से आत्मनिर्भर और पर्यावरण की दृष्टि से संतुलित बनाने की दीर्घकालिक योजना है।

हालांकि, इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश, रोजगार सृजन, पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण होगा।

यदि निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है, तो वर्ष 2047 तक उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

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