मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में अधिकारियों के साथ सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे ऐसा मंच बनाया जाए, जहां प्रवासी उत्तराखण्डियों के अनुभव, सुझाव और विशेषज्ञता प्रदेश के विकास में उपयोगी साबित हो सकें।
मुख्यमंत्री का मानना है कि देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुके उत्तराखण्डियों के पास अनुभव, संसाधन और विशेषज्ञता की बड़ी ताकत है। यदि इस क्षमता को राज्य की विकास योजनाओं से जोड़ा जाए तो उत्तराखंड को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
निवेश से लेकर रोजगार तक प्रवासियों की भागीदारी पर जोर
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रवासी उत्तराखण्डियों को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि दूसरे राज्यों और विदेशों में कारोबार, उद्योग, तकनीक और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में काम कर रहे उत्तराखण्डी अपने अनुभव और संसाधनों का उपयोग अपने गृह राज्य के विकास में भी करें।
मुख्यमंत्री ने प्रवासियों को उत्तराखंड में निवेश और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार की कोशिश है कि प्रवासियों के साथ संवाद के दौरान ऐसे अवसरों की पहचान की जाए, जिनके माध्यम से प्रदेश में नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।
विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र में निवेश, स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी।
विकसित उत्तराखंड में प्रवासियों की भूमिका पर होगा विशेष सत्र
13 नवंबर को आयोजित होने वाले सम्मेलन में अलग-अलग विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें सबसे प्रमुख सत्र ‘विकसित उत्तराखण्ड में प्रवासियों की भूमिका’ विषय पर होगा।
इस सत्र में प्रदेश के विकास में प्रवासी उत्तराखण्डियों के योगदान, उनकी विशेषज्ञता और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सरकार का प्रयास है कि प्रवासी उत्तराखण्डियों के सुझावों को केवल सुनने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उपयोगी सुझावों को आगे की विकास योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाए।
इसके अलावा ‘हौसलों की उड़ान : उत्तराखण्ड के युवा संघर्ष से सफलता के शिखर तक’ विषय पर भी विशेष संवाद आयोजित किया जाएगा।
इस सत्र में उत्तराखण्ड से निकलकर देश और विदेश में सफलता हासिल करने वाले लोगों के संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों को सामने लाया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को प्रेरित करना और उन्हें सफलता के नए रास्तों से परिचित कराना है।
लोकसंस्कृति और परंपराओं से दिखाई जाएगी उत्तराखंड की पहचान
प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन में केवल निवेश और आर्थिक विकास ही चर्चा का विषय नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए हैं कि सम्मेलन में उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की प्रभावी झलक दिखाई जाए।
उत्तराखंड के लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार चाहती है कि देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिले।
इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी मातृभूमि की संस्कृति, परंपराओं और विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपनी जन्मभूमि से जोड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध मजबूत करना भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
युवाओं को मिलेगा अनुभवी प्रवासियों से सीखने का अवसर
सम्मेलन में युवाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि देश और विदेश में सफल करियर बनाने वाले प्रवासी उत्तराखण्डियों के अनुभव प्रदेश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं।
तकनीक, स्टार्टअप, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा और कारोबार जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे प्रवासी युवाओं को नए अवसरों की जानकारी दे सकते हैं।
इसके साथ ही युवाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
सम्मेलन के माध्यम से युवा पीढ़ी और अनुभवी प्रवासियों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अनुभव और नए विचारों का आदान-प्रदान हो सके।
13 नवंबर को दून विश्वविद्यालय में होगा सम्मेलन
तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का आयोजन 13 नवंबर 2026 को देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय के डॉ. नित्यानन्द ऑडिटोरियम में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सम्मेलन की सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएं।
आयोजन स्थल पर स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, सुरक्षा, यातायात और अतिथियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और प्रत्येक व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मेलन की तैयारियों की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, उत्तराखण्ड प्रवासी परिषद के उपाध्यक्ष पूरन चन्द्र नैलवाल और ओम प्रकाश भट्ट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह और प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ के सदस्य सुधीर चन्द्र नौटियाल सहित संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
प्रवासियों के सहयोग से विकास की नई संभावनाएं तलाशेगी सरकार
उत्तराखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों में रहते हैं। इनमें से कई लोग विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
सरकार अब इन प्रवासियों के अनुभव, ज्ञान, निवेश और विशेषज्ञता को प्रदेश की विकास यात्रा से जोड़ना चाहती है।
तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके जरिए सरकार प्रवासियों के साथ मजबूत संवाद स्थापित करने और उन्हें प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदार बनाने की कोशिश कर रही है।
अब देखना होगा कि 13 नवंबर को होने वाले इस सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखण्डियों की ओर से प्रदेश के विकास के लिए किस तरह के सुझाव सामने आते हैं और निवेश, रोजगार तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में कौन-सी नई संभावनाएं विकसित होती हैं।