उत्तराखंड समाचार | 25 अक्टूबर 2026
देहरादून। उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र में एक व्यक्ति की बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाने और विरोध करने पर धमकी देने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार से बातचीत की और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के भाइयों चमन सिंह और राजपाल सिंह के नाम सामने आए हैं। शिकायतकर्ता ने उन पर फोन पर दबाव बनाने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
सीएम धामी ने पीड़ित परिवार को दिया सुरक्षा का भरोसा
मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार, 24 अक्टूबर को पीड़ित बालकराम की बेटी दीक्षा से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने परिवार को हरसंभव सहयोग और सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच करने और तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति या परिवार को भय के माहौल में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला देहरादून जिले के त्यूणी क्षेत्र के छुमरा गांव निवासी बालकराम से जुड़ा है। वह बिजली विभाग के त्यूणी उपकेंद्र में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं।
बालकराम ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 7 अक्टूबर 2026 की शाम चमन सिंह और राजपाल सिंह ने उन्हें फोन किया। शिकायत के मुताबिक, उनसे अपनी दोनों बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
बालकराम का कहना है कि उन्होंने फोन पर हुई बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था। बाद में यह कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
बेटियों के कॉलेज चुनाव से जुड़ा है विवाद
रिपोर्टों के अनुसार, बालकराम की बेटियां दीक्षा और साक्षी त्यूणी स्थित पंडित शिवराम राजकीय महाविद्यालय में पढ़ती हैं। शिकायत में बताया गया है कि दोनों ने कॉलेज के छात्र चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए चुनाव लड़ा था।
बालकराम ने आरोप लगाया कि उनकी बेटियों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर उन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत रिकॉर्ड होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार को दोबारा धमकाया गया। शिकायत के मुताबिक, आरोपित लोग कुछ अन्य लोगों के साथ बिजली उपकेंद्र भी पहुंचे थे और वहां उन्हें धमकी दी गई थी।
इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पीड़ित ने एसएसपी से की शिकायत, सुरक्षा की मांग
मामले को लेकर बालकराम ने देहरादून में एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी। उनके साथ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान सहित भाजपा के कुछ नेता भी मौजूद रहे।
बालकराम ने अपनी शिकायत में परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस से निष्पक्ष जांच करने को कहा गया है।
चमन सिंह ने ऑडियो को बताया एडिटेड
इस विवाद में चमन सिंह का पक्ष भी सामने आया है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, चमन सिंह ने वायरल ऑडियो को एडिटेड बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके बीच बातचीत हो गई है।
हालांकि, शिकायतकर्ता बालकराम ने पुलिस से मामले की जांच कराने और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है। ऐसे में वायरल ऑडियो की सत्यता, बातचीत का पूरा संदर्भ और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल
इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। भाजपा नेताओं ने आरोपों की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है। दूसरी ओर, मामले में आरोपित पक्ष की ओर से ऑडियो एडिटेड होने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री धामी के हस्तक्षेप के बाद अब पुलिस जांच पर सबकी नजर है। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल ऑडियो में क्या कहा गया, शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और कानून के तहत क्या कार्रवाई बनती है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री ने जांच के निर्देश दिए हैं और पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिया है। आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।