उत्तराखंड समाचार | 21 अक्टूबर 2026

देहरादून: उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और युवाओं को भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके तहत राज्य के सभी 45 विश्वविद्यालयों में AI की पढ़ाई और प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार का लक्ष्य हर साल एक लाख युवाओं को AI के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना है।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें नई तकनीकों, डिजिटल कौशल, नवाचार और रोजगार के बदलते अवसरों से जोड़ना है। AI का इस्तेमाल आज शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, अनुसंधान और प्रशासन सहित कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को इस तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1. सभी 45 विश्वविद्यालयों में AI शिक्षा पर जोर

राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के राज्य विश्वविद्यालयों सहित सभी 45 विश्वविद्यालयों में AI की पढ़ाई और प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। इस योजना के माध्यम से विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी समझ विकसित करने और इसके विभिन्न उपयोगों से परिचित कराने पर जोर दिया जाएगा।

 

इस कदम से AI को केवल कंप्यूटर साइंस या तकनीकी विषयों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इससे गैर-तकनीकी विषयों के विद्यार्थियों को भी AI के उपयोग को समझने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, प्रत्येक विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम का स्वरूप, प्रशिक्षण की अवधि, परीक्षा व्यवस्था और इसे लागू करने की समयसीमा से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

2. हर साल एक लाख युवाओं को AI ट्रेनिंग देने का लक्ष्य

उत्तराखंड सरकार की इस योजना का सबसे अहम पहलू प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को AI के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना है। इसका उद्देश्य प्रदेश में तकनीकी रूप से कुशल युवाओं की संख्या बढ़ाना और उन्हें रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करना है।

 

AI प्रशिक्षण के जरिए विद्यार्थियों को निम्नलिखित क्षेत्रों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की बुनियादी जानकारी।

  • डेटा साइंस और डिजिटल तकनीक का उपयोग।

  • AI आधारित टूल्स और एप्लिकेशन का व्यावहारिक ज्ञान।

  • तकनीकी समस्याओं का समाधान और नवाचार।

  • उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि ये संभावित प्रशिक्षण क्षेत्र हैं। सभी विषयों को हर विश्वविद्यालय में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की विस्तृत आधिकारिक पाठ्यक्रम सूची उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

3. गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के 1,100 विद्यार्थी हुए प्रशिक्षित

इस पहल के संदर्भ में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का उदाहरण भी सामने आया है। दैनिक जागरण की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के लगभग 1,100 विद्यार्थी AI में दक्ष हो चुके हैं। इसे प्रदेश में AI आधारित शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

 

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक कौशल विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

4. ‘AI-for-All’ पहल से भी मिलेगी मदद

उत्तराखंड में AI शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 31 जुलाई 2026 को ‘AI-for-All’ पहल भी शुरू की गई थी। उत्तराखंड के लोक भवन की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम को दून विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras), प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन और SWAYAM Plus के सहयोग से संचालित किया जाना है।

 

इस पहल के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए रोजगारोन्मुखी AI पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मकसद विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

इसमें दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की संभावना है। इससे उन छात्रों को भी लाभ मिल सकता है, जिन्हें बड़े तकनीकी संस्थानों में जाकर पढ़ने का अवसर नहीं मिलता।

5. AI से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग अब कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। उत्तराखंड जैसे राज्य में इसके माध्यम से स्थानीय समस्याओं के समाधान और रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

AI कौशल हासिल करने वाले युवाओं के लिए भविष्य में निम्न क्षेत्रों में अवसर बन सकते हैं:

  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और AI एप्लिकेशन निर्माण।

  • डेटा विश्लेषण और डिजिटल सेवाएं।

  • पर्यटन क्षेत्र में स्मार्ट सेवाओं का विकास।

  • कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में तकनीक आधारित समाधान।

  • स्टार्टअप और स्वरोजगार से जुड़ी नई पहल।

हालांकि, AI प्रशिक्षण प्राप्त करना अपने आप में नौकरी की गारंटी नहीं है। रोजगार की संभावनाएं विद्यार्थियों के कौशल, व्यावहारिक अनुभव, योग्यता और उद्योगों की मांग पर निर्भर करेंगी।

6. विद्यार्थियों के लिए क्या होगा खास?

विश्वविद्यालयों में AI शिक्षा का विस्तार होने से विद्यार्थियों को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकी कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है। इससे वे अपने विषय के ज्ञान का उपयोग नई तकनीकों के साथ कर सकेंगे।

उदाहरण के लिए, प्रबंधन के विद्यार्थी डेटा विश्लेषण में, कृषि के विद्यार्थी फसल संबंधी जानकारी के विश्लेषण में और कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थी AI आधारित सॉफ्टवेयर बनाने में इस तकनीक का उपयोग सीख सकते हैं।

इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए AI से मिलने वाले परिणामों की जांच करना, गलत जानकारी पहचानना, डेटा की सुरक्षा समझना और तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी होगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में सभी 45 विश्वविद्यालयों में AI की पढ़ाई और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने तथा प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य उच्च शिक्षा में तकनीकी कौशल को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ‘AI-for-All’ जैसी पहल भी इस दिशा में सहयोग कर सकती है।

अब इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षण किस तरह लागू किया जाता है, विद्यार्थियों को कितनी व्यावहारिक शिक्षा मिलती है और उनके कौशल को रोजगार तथा उद्यमिता से जोड़ने के लिए क्या व्यवस्थाएं की जाती हैं।

 

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