अमर उजाला और दैनिक जागरण की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों और बागवानों को आर्थिक राहत प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि फसल खराब होने के बाद किसानों पर बिजली बिल, कृषि खर्च और ऋण चुकाने का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में राहत के इन उपायों से उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति संभालने में मदद मिल सकती है।
ओलावृष्टि से धान की फसल को भारी नुकसान
बीते 9 अक्टूबर को ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर, गदरपुर और रुद्रपुर क्षेत्र में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा था। कई स्थानों पर खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में दाने झड़ने और जलभराव की समस्या सामने आई। इससे किसानों की मेहनत और कृषि पर किए गए खर्च को नुकसान पहुंचा।
ओलावृष्टि की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को फसलों के नुकसान का आकलन कर समय पर राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के बिजली बिल होंगे माफ
मुख्यमंत्री धामी ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीने के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है। इस निर्णय से पात्र प्रभावित किसानों को तीन महीने के बिजली बिलों का भुगतान नहीं करना होगा।
फसल खराब होने के बाद किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए बीज, खाद, सिंचाई और कृषि उपकरणों पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे समय में बिजली बिलों से राहत मिलने पर किसानों को उपलब्ध धनराशि का उपयोग अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किन किसानों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा और इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग के निर्देशों से स्पष्ट होगी।
KCC ऋण की वसूली तीन महीने स्थगित कराने की पहल
किसानों को दूसरी बड़ी राहत किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC ऋण के संबंध में देने की तैयारी है। राज्य सरकार प्रभावित किसानों के ऋण की अदायगी तीन महीने तक स्थगित कराने के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय को पत्र भेजेगी।
KCC के माध्यम से किसान खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए ऋण प्राप्त करते हैं। फसल खराब होने की स्थिति में निर्धारित समय पर ऋण चुकाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। ऐसे में यदि तीन महीने की मोहलत को मंजूरी मिलती है, तो प्रभावित किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि KCC ऋण की अदायगी स्थगित कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाना है। इसलिए इसे केंद्र की ओर से पहले से स्वीकृत निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। ऋण स्थगन की अंतिम शर्तें और लागू होने की प्रक्रिया संबंधित मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगी।
आपदा राहत के अतिरिक्त भी मिलेगी आर्थिक सहायता
राज्य सरकार ने केवल बिजली बिल और ऋण भुगतान से राहत देने तक ही कदम सीमित नहीं रखे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, ओलावृष्टि से प्रभावित कृषि, औद्यानिकी और गन्ने की फसलों के नुकसान के लिए निर्धारित आपदा राहत मानकों के तहत मिलने वाली सहायता के बराबर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।
इसका उद्देश्य किसानों को फसल क्षति से उबरने और आगामी कृषि गतिविधियों को जारी रखने में सहायता देना है। आम, अमरूद और अन्य बागवानी फसलों को हुए नुकसान का भी आकलन कर राहत पहुंचाने की बात कही गई है।
अधिकारियों को नुकसान का आकलन करने और राहत संबंधी कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सहायता की वास्तविक राशि प्रभावित फसल, नुकसान के आकलन और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होगी।
किसानों को राहत देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने और प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न कठिनाइयों से उन्हें उबारने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित किसानों को समय पर सहायता मिले और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।
ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए घोषित उपायों में अतिरिक्त आर्थिक सहायता, तीन महीने के बिजली बिलों में राहत और KCC ऋण की अदायगी स्थगित कराने का प्रस्ताव शामिल है। इन कदमों से किसानों को फसल नुकसान के बाद आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब प्रभावित किसानों को राहत वितरण की प्रक्रिया, पात्रता और ऋण स्थगन संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार रहेगा।