उत्तराखंड समाचार | 27 अक्टूबर 2026

देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया है। इस बजट में सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में ₹4,164.32 करोड़ पूंजीगत मद के लिए रखे गए हैं, जो कुल अनुपूरक बजट का लगभग 53.1 प्रतिशत है।

सरकार की योजना के तहत पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने, ग्रामीण संपर्क मार्गों का रखरखाव करने और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग मदों में धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे राज्य के दूरस्थ इलाकों में आवागमन, पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

₹7,844 करोड़ के अनुपूरक बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, अनुपूरक बजट में सीधे तौर पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए करीब ₹1,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का जोर निर्माण कार्यों के साथ-साथ मौजूदा सुविधाओं के रखरखाव और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी है।

किस विभाग और परियोजना को कितनी धनराशि मिली?

रिपोर्ट में दिए गए प्रमुख बजटीय प्रावधान इस प्रकार हैं:

विभाग/परियोजना आवंटित धनराशि
अवसंरचना विकास ₹500 करोड़
ऊर्जा क्षेत्र ₹270 करोड़
पेयजल एवं संबंधित परियोजनाएं ₹532 करोड़
ग्रामीण सड़कों का रखरखाव ₹61 करोड़
जोशीमठ भू-धंसाव से जुड़े कार्य ₹48 करोड़
शहरी विकास की एडीबी योजनाएं ₹100 करोड़
शहरी विकास विभाग के भवन ₹15 करोड़
पुलिस आवासीय भवन ₹55 करोड़
न्यायिक बुनियादी ढांचा ₹22 करोड़
पंचायत भवन निर्माण ₹5 करोड़
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थानों का बुनियादी ढांचा ₹160 करोड़
नए स्टेट डेटा सेंटर का निर्माण ₹40 करोड़

 

1. ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए ₹61 करोड़

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं। अनुपूरक बजट में ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के लिए ₹61 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

  • लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत ₹31 करोड़।

  • ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ₹30 करोड़।

इस राशि से संबंधित सड़कों के रखरखाव में सहायता मिलने की उम्मीद है। बेहतर संपर्क मार्ग ग्रामीण आबादी को बाजार, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अवसरों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. ऊर्जा क्षेत्र को ₹270 करोड़

बिजली की मांग बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली वितरण और पारेषण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है। बजट में ऊर्जा क्षेत्र की विभिन्न मदों के लिए ₹270 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसमें खुड़पिया फार्म परियोजना सहित बिजली पारेषण और वितरण से संबंधित मदें शामिल हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य बिजली नेटवर्क की क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करना है।

 

3. पेयजल परियोजनाओं के लिए ₹532 करोड़

पेयजल क्षेत्र में कुल ₹532 करोड़ के प्रावधान का उल्लेख किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मदें शामिल हैं:

  • जल जीवन मिशन: बकाया भुगतान के लिए ₹300 करोड़।

  • गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना: ₹122 करोड़।

  • केएफडब्ल्यू परियोजना: लगभग ₹110 करोड़।

इन परियोजनाओं के लिए बजटीय सहायता से पेयजल योजनाओं को आगे बढ़ाने और संबंधित भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

4. जोशीमठ में भू-धंसाव से जुड़े कार्यों के लिए ₹48 करोड़

जोशीमठ में भू-धंसाव की समस्या के मद्देनजर संबंधित कार्यों के लिए ₹48 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि प्रभावित क्षेत्र से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए रखी गई है।

जोशीमठ जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास करते समय सुरक्षा, स्थिरता और आपदा जोखिम को ध्यान में रखना आवश्यक है। हालांकि, इस बजटीय प्रावधान से किसी विशिष्ट कार्य के पूरा होने की समयसीमा की पुष्टि नहीं होती।

 

5. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए ₹200 करोड़

स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा से संबंधित बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए कुल ₹200 करोड़ का प्रावधान बताया गया है।

इसमें:

  • पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज तथा नर्सिंग कॉलेजों के लिए ₹160 करोड़।

  • नए स्टेट डेटा सेंटर के निर्माण के लिए ₹40 करोड़।

चिकित्सा एवं नर्सिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने से भविष्य में प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्टेट डेटा सेंटर का निर्माण डिजिटल प्रशासन और सरकारी आंकड़ों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

 

6. शहरी विकास और सरकारी भवनों पर खर्च

शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए भी बजट में धनराशि रखी गई है।

  • शहरी विकास की एडीबी योजनाओं के लिए ₹100 करोड़।

  • शहरी विकास विभाग के भवनों के लिए ₹15 करोड़।

  • पुलिस आवासीय भवनों के लिए ₹55 करोड़।

  • न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए ₹22 करोड़।

  • पंचायत भवन निर्माण के लिए ₹5 करोड़।

इन मदों का उद्देश्य संबंधित विभागों की अवसंरचना जरूरतों को पूरा करने में सहायता देना है। वास्तविक लाभ परियोजनाओं की स्वीकृति, क्रियान्वयन और समय पर काम पूरा होने पर निर्भर करेगा।

 

7. धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के लिए ₹340 करोड़

अनुपूरक बजट में धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत और तीर्थ क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं। दैनिक जागरण की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इस मद में कुल ₹340 करोड़ रखे गए हैं।

परियोजना धनराशि
कुंभ मेले की व्यवस्थाएं एवं अवस्थापना विकास ₹290 करोड़
हरिद्वार गंगा कॉरिडोर ₹30 करोड़
नंदा राजजात के संचालन के लिए पूंजीगत मद ₹20 करोड़

इन प्रावधानों से धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं, तीर्थ क्षेत्रों में सुविधाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े कार्यों को सहायता मिलने की उम्मीद है।

 

क्या होगा इस अनुपूरक बजट का संभावित असर?

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क, पेयजल, बिजली और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में निवेश का विशेष महत्व है। बजट के संभावित प्रभावों को तीन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  1. ग्रामीण संपर्क बेहतर करने में मदद: सड़कों के रखरखाव से गांवों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।

  2. बुनियादी सुविधाओं का विस्तार: पेयजल, बिजली और शहरी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिलने से संबंधित कार्य आगे बढ़ सकते हैं।

  3. स्वास्थ्य एवं पर्यटन को समर्थन: चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, कुंभ और गंगा कॉरिडोर से संबंधित प्रावधान विकास गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

हालांकि, अनुपूरक बजट में धनराशि का प्रावधान अपने आप में किसी परियोजना के पूरा होने या नागरिकों को तत्काल लाभ मिलने की गारंटी नहीं है। इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति, धनराशि का वास्तविक उपयोग और परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी होगा।

 

 

By admin

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