देहरादून/बनबसा, 5 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 4 अक्टूबर को बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर डॉक्टरों के मानदेय को बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। खास बात यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक मानदेय दिया जाएगा।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इससे पहले उन्हें करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे थे। यानी नई व्यवस्था के तहत उनके मानदेय में लगभग 20 हजार रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी। सरकार का उद्देश्य पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

वहीं, मैदानी क्षेत्रों में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का मानदेय 84 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इस तरह मैदानों में भी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में करीब 21 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने पहाड़ और मैदान के बीच मानदेय का अंतर बनाए रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की है।

जूनियर रेजिडेंट का मानदेय भी बढ़ा

कैबिनेट ने केवल सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में ही बदलाव नहीं किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का मानदेय 76 हजार रुपये से बढ़ाकर 85 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में जूनियर रेजिडेंट को अब 80 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, जबकि पहले यह राशि करीब 71 हजार रुपये थी।

इसी तरह डेमोंस्ट्रेटर डॉक्टरों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में डेमोंस्ट्रेटर को अब 85 हजार रुपये और मैदानी क्षेत्रों में 80 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इस फैसले से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और शिक्षण चिकित्सा कर्मियों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की कोशिश

उत्तराखंड लंबे समय से पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता की चुनौती का सामना कर रहा है। दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को लंबे समय तक रोकना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। ऐसे में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ों में अधिक मानदेय देने का फैसला डॉक्टरों को पर्वतीय क्षेत्रों में सेवा देने के लिए आकर्षित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अमर उजाला के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है और कई महत्वपूर्ण विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में कम चिकित्सक उपलब्ध हैं।

सरकार को उम्मीद है कि मानदेय बढ़ने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बेहतर होगी। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। खासकर पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को इलाज के लिए देहरादून या अन्य बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में डॉक्टर होंगे लाभान्वित

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वर्तमान में 251 जूनियर रेजिडेंट, 134 डेमोंस्ट्रेटर और 246 सीनियर रेजिडेंट कार्यरत हैं। मानदेय में बढ़ोतरी का लाभ इन पदों पर कार्यरत चिकित्सकों को मिलेगा।

सरकार का मानना है कि डॉक्टरों को बेहतर आर्थिक प्रोत्साहन देने से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के इलाज और चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ और मैदान के लिए अलग मानदेय

इस फैसले में सरकार ने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने और काम करने की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। कई अस्पताल दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं और वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता एक चुनौती रहती है। इसलिए सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अपेक्षाकृत अधिक मानदेय निर्धारित किया है।

नई व्यवस्था के अनुसार:

पद मैदानी क्षेत्र पर्वतीय क्षेत्र
सीनियर रेजिडेंट ₹1.05 लाख/माह ₹1.10 लाख/माह
जूनियर रेजिडेंट ₹80,000/माह ₹85,000/माह
डेमोंस्ट्रेटर ₹80,000/माह ₹85,000/माह

इन नई दरों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद बताया कि राज्य सरकार डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि की जानकारी देते हुए कहा कि पहले मिलने वाली राशि करीब 75 हजार रुपये के आसपास थी, जिसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक किया गया है।

कुल मिलाकर, धामी कैबिनेट का यह फैसला उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में सीनियर रेजिडेंट को ₹1.10 लाख और जूनियर रेजिडेंट तथा डेमोंस्ट्रेटर को ₹85 हजार प्रतिमाह मिलने से सरकार को उम्मीद है कि पहाड़ी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी। यदि पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवाएं देते हैं, तो इसका लाभ दूरस्थ इलाकों के मरीजों को सीधे मिल सकता है।

 

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