चंपावत/बनबसा, 5 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राज्य गठन के बाद पहली बार चंपावत जिले में कैबिनेट बैठक होने के कारण इसे सीमांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बैठक में शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार, स्वास्थ्य, प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए।
इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी देना रहा। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं की रोजगार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य के राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
योजना के तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक डिग्री शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक और आधुनिक कौशल से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। कैबिनेट से जुड़े विवरण के अनुसार छात्रों के लिए स्किल आधारित पाठ्यक्रमों को उच्च शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण भी शामिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी बनाने के बजाय उन्हें बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में रोजगार के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है। उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों में लगातार नए कौशल की मांग बढ़ रही है। ऐसे में उच्च शिक्षा के दौरान ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण देने से उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। पांच वर्षों में प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये का निवेश इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक का महत्व केवल 200 करोड़ रुपये की कौशल विकास योजना तक सीमित नहीं रहा। बैठक में पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तारीकरण से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके लिए उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को हस्तांतरित परिसंपत्तियों के संबंध में करीब 66.29 करोड़ रुपये की शेष धनराशि जारी करने की स्वीकृति दी गई।
कैबिनेट ने भूमि अधिकार से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए। वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों तथा कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में भूमि के विनियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इन फैसलों से लंबे समय से भूमि अधिकार से जुड़े मामलों का सामना कर रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए पहले लागू भूमि संबंधी शर्तों में संशोधन किया गया है। सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थानों के लिए रास्ता आसान करने के साथ-साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा से संबंधित प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोस्ट्रेटर के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला किया गया। इससे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैठक में कर्मचारियों की जवाबदेही से जुड़े नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई। कर्मचारियों के संपत्ति विवरण से संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इसके अलावा समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे बदलावों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
बनबसा में कैबिनेट बैठक आयोजित करने का एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश भी है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि मंत्रिमंडल की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय समस्याओं और क्षेत्रीय विकास की जरूरतों को सीधे शासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
सीमांत क्षेत्र बनबसा में कैबिनेट बैठक आयोजित होने को विशेष महत्व इसलिए भी दिया जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। सरकार ने सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने को प्राथमिकता देने की बात कही है। ऐसे क्षेत्रों में शासन की सीधी मौजूदगी से स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
सबसे अहम बात यह है कि ₹200 करोड़ की राशि बनबसा शहर के लिए सीधे विकास बजट के रूप में घोषित नहीं हुई है। यह राशि पूरे उत्तराखंड में लागू होने वाली मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 के लिए अगले पांच वर्षों में खर्च की जानी है। बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस योजना को मंजूरी मिली है। इसलिए इसे “बनबसा के विकास के लिए ₹200 करोड़” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
इस फैसले से उत्तराखंड के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने की कोशिश की जा रही है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो विद्यार्थियों को कॉलेज स्तर पर ही उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता से संबंधित अवसर मिल सकते हैं। खासकर एआई और नई तकनीकों को कौशल शिक्षा से जोड़ना आने वाले वर्षों में युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बनबसा की इस कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को उत्तराखंड सरकार की शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक सुधार, भूमि अधिकार और सीमांत क्षेत्रों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। 200 करोड़ रुपये की कौशल विकास योजना के साथ पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार, भूमि अधिकार और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े फैसलों से सरकार ने एक साथ कई क्षेत्रों पर अपना फोकस दिखाया है।