देहरादून। उत्तराखंड में नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा के विस्तार के तहत तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन कॉलेजों के शुरू होने से नर्सिंग के विभिन्न पाठ्यक्रमों में 321 अतिरिक्त सीटें बढ़ी हैं। सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर प्रदेश में नर्सिंग की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 11,495 हो गई है।
अमर उजाला की 17 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2021 के बाद प्रदेश में तीन नए सरकारी नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए। सरकार का उद्देश्य नर्सिंग शिक्षा के अवसर बढ़ाने, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता मजबूत करने और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करना है।
सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 321 सीटों की बढ़ोतरी
प्रदेश में स्थापित तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 321 सीटें बढ़ाई गई हैं। इन सीटों का विवरण इस प्रकार है:
- बीएससी नर्सिंग: 151 सीटें
- एमएससी नर्सिंग: 120 सीटें
- नर्स प्रैक्टिशनर इन क्रिटिकल केयर (NPCC): 20 सीटें
- नर्स प्रैक्टिशनर इन मिडवाइफरी (NPM): 30 सीटें
इन सीटों में बढ़ोतरी के बाद प्रदेश के राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न पाठ्यक्रमों की कुल सीटें 879 हो गई हैं। इससे नर्सिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं को सरकारी संस्थानों में पढ़ाई के अधिक अवसर मिलेंगे।
निजी नर्सिंग संस्थानों में भी बढ़े अवसर
उत्तराखंड में नर्सिंग शिक्षा का विस्तार केवल सरकारी कॉलेजों तक सीमित नहीं है। निजी नर्सिंग संस्थानों में भी सीटों की संख्या बढ़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2021 के बाद प्रदेश के 76 निजी नर्सिंग संस्थानों को विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अनिवार्यता प्रमाणपत्र जारी किए गए। इन संस्थानों में अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए 5,138 सीटों को मंजूरी दी गई।
इसके बाद निजी नर्सिंग संस्थानों में कुल सीटों की संख्या 10,616 तक पहुंच गई है। सरकारी और निजी संस्थानों की उपलब्ध सीटों को मिलाकर प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की कुल क्षमता 11,495 हो गई है।
उत्तराखंड के नर्सिंग संस्थानों में राज्य के विद्यार्थियों के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों से भी विद्यार्थी पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।
जापान और जर्मनी में भी मिल रहा रोजगार
उत्तराखंड में नर्सिंग और व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में दो बैचों के कुल 60 अभ्यर्थियों को जापान में रोजगार मिला। वहीं, वर्ष 2025 में 13 अभ्यर्थियों को जर्मनी में रोजगार प्राप्त हुआ।
विदेशी भाषा प्रशिक्षण और कौशल विकास से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार में अवसर प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, विदेश में नौकरी पाने के लिए संबंधित देश की भाषा, योग्यता, लाइसेंस और अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करना भी आवश्यक होता है।
नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति और नए पदों के सृजन की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में दिए गए विवरण के अनुसार:
- दिसंबर 2021 में 40 नर्सिंग ट्यूटर नियुक्त किए गए।
- जून 2025 तक 26 अतिरिक्त ट्यूटर नियुक्त हुए, जिससे नियमित नर्सिंग ट्यूटरों की संख्या 66 हो गई।
- अक्टूबर 2022 में आठ असिस्टेंट प्रोफेसर और एक एसोसिएट प्रोफेसर सहित नौ संकाय सदस्यों की नियुक्ति हुई।
- नवंबर 2025 में सात और संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई।
इसके अतिरिक्त, 16 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। सितंबर 2026 में 30 नर्सिंग ट्यूटरों की भर्ती के लिए अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजे जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
हर साल 12 से 15 हजार अभ्यर्थी लेते हैं प्रवेश परीक्षा में भाग
उत्तराखंड में नर्सिंग शिक्षा के प्रति युवाओं की रुचि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा के लिए हर साल लगभग 12,000 से 15,000 अभ्यर्थी आवेदन करते हैं।
ऐसे में नर्सिंग पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ने से विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिक विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और अस्पतालों में व्यावहारिक अनुभव की उपलब्धता से नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिलेगा लाभ
नर्सिंग शिक्षा का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों की भूमिका मरीजों की देखभाल, उपचार के दौरान सहायता, गंभीर रोगियों की निगरानी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में अहम होती है।
सरकारी और निजी नर्सिंग संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ने से भविष्य में प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिले और पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।