वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
को एक बड़ा न्यायिक झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लागू किए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक 6-3 के फैसले में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास 1977 के आपातकालीन कानून के तहत एकतरफा तरीके से असीमित शुल्क लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय में कहा कि कर और शुल्क लगाने की शक्ति संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
- IEEPA कानून की व्याख्या: कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का हवाला देकर टैरिफ को जायज ठहराया गया था।
- रिफंड की संभावना: इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को आयातकों को लगभग 175 अरब डॉलर तक का रिफंड देना पड़ सकता है, जो अब तक अवैध रूप से वसूला गया है।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया और नया दांव
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जजों को ‘राष्ट्र के लिए अपमान’ बताया। हालांकि, उन्होंने तुरंत एक वैकल्पिक रास्ता अपनाते हुए 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के नए आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह नया शुल्क 24 फरवरी 2026 से लागू होगा, लेकिन यह केवल 150 दिनों के लिए ही मान्य हो सकता है जब तक कि संसद इसे विस्तार न दे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जजों को ‘राष्ट्र के लिए अपमान’ बताया। हालांकि, उन्होंने तुरंत एक वैकल्पिक रास्ता अपनाते हुए 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के नए आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह नया शुल्क 24 फरवरी 2026 से लागू होगा, लेकिन यह केवल 150 दिनों के लिए ही मान्य हो सकता है जब तक कि संसद इसे विस्तार न दे।
भारत पर क्या होगा असर?
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट के इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। समझौते के तहत भारत पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क पहले ही 25% से घटाकर 18% कर दिया गया था, जो लागू रहेगा।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट के इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। समझौते के तहत भारत पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क पहले ही 25% से घटाकर 18% कर दिया गया था, जो लागू रहेगा।